नौनिहालों को निमोनिया से बचाएगा “सांस अभियान” 12 नवंबर से 28 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान, प्रदेशभर में होंगी जागरूकता गतिविधियां
राजस्थान में 12 नवंबर से 28 फरवरी तक चलने वाला “सांस अभियान” पाँच वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया से बचाव के लिए शुरू किया गया है। सवाई माधोपुर में सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि आशा-एएनएम घर-घर सर्वे कर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी और पीसीवी वैक्सीन के जरिए रोग से सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

सवाई माधोपुर, 11 नवम्बर।
सर्दियों के मौसम में जब ठंड की दस्तक के साथ ही बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, तब प्रदेशभर में “सांस अभियान” छोटे बच्चों को निमोनिया से बचाने का एक सशक्त प्रयास लेकर आ रहा है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार 12 नवंबर से 28 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य पाँच वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया जनित मृत्यु दर को कम करना है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि राज्य स्तर से मिले निर्देशों के अनुरूप अभियान की प्रभावी रूपरेखा तैयार कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आशा और एएनएम कार्यकर्ता घर-घर जाकर बीमार बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी, साथ ही आवश्यकतानुसार रैफरल और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान "निमोनिया नहीं तो बचपन सही" थीम पर विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
डॉ. जेमिनी ने बताया कि स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) माध्यमों के जरिए आमजन को निमोनिया के लक्षण, बचाव और उपचार संबंधी जानकारी दी जाएगी। आशा सहयोगिनियां और एएनएम बच्चों में निमोनिया की शुरुआती पहचान कर समय पर चिकित्सकीय परामर्श के लिए परिजनों को प्रेरित करेंगी।
उन्होंने आगे बताया कि निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन की तीन खुराक — 6 सप्ताह, 14 सप्ताह और 9 माह की उम्र पर — अवश्य दिलानी चाहिए। यह वैक्सीन सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध है।
निमोनिया फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है, और पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज खांसी-जुकाम, तेजी से सांस लेना, पसलियों का चलना, तेज बुखार, झटके आना, खाना न खाना, सुस्ती या अत्यधिक नींद आना शामिल हैं। ऐसे में बच्चों की तुरंत चिकित्सा जांच करवाना आवश्यक है।
डॉ. जेमिनी ने कहा कि निमोनिया से बचाव के लिए घर के वातावरण को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। रसोई और कमरों में धुआं न होने दें, खिड़कियां खुली रखें, और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। नवजात शिशु को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराएं, छह माह तक केवल माँ का दूध दें, उसके बाद पौष्टिक आहार शामिल करें। खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को साबुन से धोना, पीने के पानी को ढककर रखना और समय पर बच्चे का टीकाकरण कराना निमोनिया से सुरक्षा की प्रभावी ढाल है।
सांस अभियान के जरिए स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य न केवल बीमारी पर नियंत्रण बल्कि अभिभावकों को जागरूक कर हर बच्चे को स्वस्थ बचपन की ओर अग्रसर करना है।
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