सवाई माधोपुर में कृषि विभाग के प्रयासों से बढ़ रहा गेंदा फूलों का रकबा, किसानों को अच्छा मुनाफा
सवाई माधोपुर में कृषि विभाग के प्रयासों से गेंदा फूलों का रकबा बढ़ रहा है। किसान एक बीघा में लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। अफ्रीकी और फ्रेंच गेंदा की खेती से न केवल धार्मिक और सामाजिक मांग पूरी होती है बल्कि आर्थिक लाभ भी मिलता है।

सवाई माधोपुर। गेंदा, भारत में व्यापक रूप से उगाया जाने वाला फूल, अब सवाई माधोपुर के खेतों में तेजी से फैल रहा है। इसकी खेती न केवल सुंदरता और खुशबू के लिए लोकप्रिय है, बल्कि इसे किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी माना जाता है। गेंदा फूल धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में विशेष रूप से प्रयोग किए जाते हैं और कीट नियंत्रण के लिए भी ट्रैप क्रॉप के रूप में इसका महत्व है।
आकार और रंग के आधार पर गेंदा की दो प्रमुख प्रजातियाँ हैं – अफ्रीकी गेंदा और फ्रेंच गेंदा। अफ्रीकी गेंदा लंबे और बड़े फूल वाले होते हैं, जबकि फ्रेंच गेंदा छोटे आकार के, जल्दी पकने वाले और आकर्षक रंगों में उपलब्ध होते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश लंबे समय से गेंदा के बड़े उत्पादक हैं, लेकिन अब राजस्थान में भी इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है। विशेषकर सवाई माधोपुर के किसान दशहरा और दीवाली के त्योहारों के मद्देनजर गेंदा की खेती अपना रहे हैं।
कृषि विभाग के फूल उत्कृता केंद्र सवाई माधोपुर द्वारा किसानों को प्रशिक्षण देकर फसल की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू लाल मीना ने बताया कि गंगापुरसिटी उपखंड के अमरगढ़ मालियों की चौकी के किसान हेमराज सैनी सहित दर्जनों किसान एक बीघा में 1 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। हेमराज ने बताया कि पहले परंपरागत फसलें लगाई जाती थीं, लेकिन उनमें अपेक्षित लाभ नहीं मिलता था। कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने गेंदा की खेती अपनाई और अब आसपास के बाजारों में इसे बेचकर अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
गेंदा की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी दोमट या बलुई दोमट मानी जाती है, जिसमें पीएच मान 6.0-7.5 हो। खेत की तैयारी में गहरी जुताई और जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है। वर्षा और सर्दी के मौसम के अनुसार रोपण किया जाता है, जैसे वर्षा में जून-जुलाई और सर्दी में सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी से तैयार पौधों की रोपाई। अफ्रीकी किस्म के पौधों की दूरी 45x45 सेमी और फ्रेंच किस्म की 35x35 सेमी रखी जाती है।
फसल में उचित सिंचाई और पोषक तत्व प्रबंधन के माध्यम से लगभग 50-55 दिनों में फूल आने लगते हैं। प्रमुख किस्मों में अफ्रीकन गेंदा, जॉइंट डबल, क्राउन ऑफ गोल्ड, अफ्रीकन येलो, फ्रेंच गेंदा, पुसा बसंती गेंदा और पुसा नारंगी गेंदा शामिल हैं। विशेष रूप से पुसा नारंगी गेंदा की ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है।
कृषि विभाग के निरंतर प्रयासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के चलते जिले के किसान फसल विविधीकरण को अपना रहे हैं। फल, फूल, सब्जी, दलहन, तिलहन, औषधीय, सुगंधित और मसाले वाली फसलें उगाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। हेमराज और अन्य किसान न केवल फूल बेचते हैं, बल्कि स्वयं माला बनाकर बाजार में उपलब्ध कराते हैं, जिससे उन्हें पांच गुना तक अधिक लाभ मिलता है।
सवाई माधोपुर में गेंदा की खेती में बढ़ती रुचि और बढ़ता रकबा यह दर्शाता है कि कृषि विभाग की पहल सफल हो रही है और किसानों के आर्थिक विकास में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
