डॉ. मुखर्जी का बलिदान दिवस: एक देश, एक विधान के संकल्प के साथ याद किए गए राष्ट्र नायक
गंगापुर सिटी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस पर उमड़ा राष्ट्रप्रेम का सैलाब, हिंदू रत्न राहुल गोयल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने 'एक देश, एक विधान' के संकल्प को दोहराते हुए राष्ट्रनायक को दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

गंगापुर सिटी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ता और नागरिक, जिन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
गंगापुर सिटी। राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 73वां बलिदान दिवस आज देश भर में गहरे आदर और संकल्प के साथ याद किया गया। इसी कड़ी में राजस्थान के गंगापुर सिटी स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच के कार्यालय में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां राष्ट्रनायक के सिद्धांतों और अखंड भारत के उनके सपने को आगे बढ़ाने का पुरजोर संकल्प लिया गया। मंच के हिंदू रत्न राहुल गोयल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत बेहद भावुक और गरिमामयी माहौल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए हिंदू रत्न राहुल गोयल ने डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक संघर्षों को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन में बेहद कड़े शब्दों में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का इस राष्ट्र के निर्माण और उसकी सीमाओं की रक्षा के लिए दिया गया योगदान अतुलनीय है। उन्होंने उस दौर में 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का सिंहनाद कर कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
अपने संबोधन की गहराई को बढ़ाते हुए गोयल ने आगे कहा कि डॉ. मुखर्जी का एकमात्र अटूट सपना 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सशक्त भारत, और संस्कारवान भारत' का निर्माण करना था। आज के इस ऐतिहासिक दिन पर मंच का प्रत्येक कार्यकर्ता उनके इसी अधूरे सपने को साकार करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा में मंच के प्रदीप सोनी, पिंटू पंसारी, अशोक पटवा, अंशुल डगयाच और महेंद्र शर्मा सहित क्षेत्र के कई गणमान्य कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. मुखर्जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने और देश सेवा में तत्पर रहने की सामूहिक शपथ ली।

