आकस्मिक जेल निरीक्षण में सचिव समीक्षा गौतम सख्त, विचाराधीन बंदियों के अधिकारों और पेशी व्यवस्था की गहन समीक्षा
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव समीक्षा गौतम ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की पालना में जिला कारागृह सवाई माधोपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण में विचाराधीन बंदियों की पेशी, अधिवक्ता की उपलब्धता, ट्रायल में आ रही बाधाओं और प्रिजन लीगल एड व्यवस्था की गहन समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

सवाई माधोपुर, 19 दिसंबर 2025।
विचाराधीन बंदियों के संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समीक्षा गौतम ने शुक्रवार को जिला कारागृह सवाई माधोपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शशि उर्फ शशि चिकना विवेकानंद जुरमानी बनाम महाराष्ट्र राज्य, एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 12690/2025 में पारित आदेश की अनुपालना में किया गया।
निरीक्षण के दौरान सचिव समीक्षा गौतम ने जेल प्रशासन के कार्यकलापों का बारीकी से जायजा लिया और जिला कारागृह के उपाधीक्षक बिहारीलाल तथा जेलर ताराचंद शर्मा से विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विशेष रूप से ऐसे विचाराधीन बंदियों की स्थिति पर चर्चा की, जिन्हें ट्रायल के दौरान अदालत में पेश होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पेशी में आ रही बाधाओं के कारणों, प्रशासनिक एवं प्रणालीगत कमियों पर भी गंभीर मंथन किया गया।
निरीक्षण में उन बंदियों की सूची और स्थिति की भी समीक्षा की गई, जिन्होंने आरोपित अपराध की निर्धारित अधिकतम सजा अवधि का आधा अथवा एक तिहाई से अधिक समय हिरासत में व्यतीत कर लिया है। इसके साथ ही बंदियों के पास अधिवक्ता की उपलब्धता, जेल विजिटिंग लॉयर और जेल विजिटिंग अधिकार मित्र द्वारा प्रिजन लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से की जा रही विधिक सहायता तथा बंदियों के साथ उनके संवाद की प्रभावशीलता की भी जांच की गई।
सचिव समीक्षा गौतम ने उपाधीक्षक बिहारीलाल को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक विचाराधीन बंदी को अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि ट्रायल कार्यवाही के दौरान बंदियों को नियत समय पर अदालतों के समक्ष, चाहे वह व्यक्तिगत रूप से हो या वर्चुअल माध्यम से, प्रस्तुत किया जाए ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
इस निरीक्षण के दौरान अधिकार मित्र मगनलाल मीना भी उपस्थित रहे। यह आकस्मिक निरीक्षण न केवल जेल प्रशासन की जवाबदेही को रेखांकित करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि न्यायिक व्यवस्था में विचाराधीन बंदियों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
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