प्रशासनिक सेवा केवल कार्यालयी कार्यों तक सीमित नहीं रहकर समाज परिवर्तन का माध्यम भी बन सकती है—इसका जीवंत उदाहरण टोडाभीम के एसडीएम अमन चौधरी हैं, जो पिछले 25 वर्षों से नशामुक्ति अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी पहल से अब तक करीब 5 हजार लोग तंबाकू, गुटखा, बीड़ी और अन्य नशों की लत से बाहर आ चुके हैं।

एसडीएम अमन चौधरी कार्यालय और फील्ड दोनों स्तरों पर नशामुक्ति की शपथ दिलाते हैं। उपखंड कार्यालय में जब कोई फरियादी गुटखा या तंबाकू का सेवन करते हुए पहुंचता है, तो वे उसे अपने पास बुलाकर आत्मीयता से नशे के दुष्परिणाम समझाते हैं और पानी का लोटा देकर नशा छोड़ने की शपथ दिलाते हैं। उनकी यह कार्यशैली लोगों पर गहरा प्रभाव डाल रही है और कई लोग मौके पर ही नशा छोड़ने का संकल्प ले रहे हैं।

चौधरी का कहना है कि तंबाकू और गुटखा शरीर को धीरे-धीरे भीतर से नष्ट करते हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है और परिवार आर्थिक व मानसिक संकट में आ जाते हैं। उनके अनुसार समय रहते जागरूकता ही परिवारों को बर्बादी से बचा सकती है।

इस अभियान की शुरुआत उन्होंने किसी प्रशासनिक जिम्मेदारी के बाद नहीं, बल्कि वर्ष 2000 में अपने जीवन के शुरुआती दौर में ही कर दी थी। अपने जन्मदिन पर उन्होंने किसान पिता पूर्णाराम से उपहार के रूप में बीड़ी छोड़ने का आग्रह किया था, जिसे पिता ने स्वीकार किया। यहीं से उनके मन में समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प मजबूत हुआ।

नागौर जिले के अमरपुरा गांव के किसान परिवार में जन्मे अमन चौधरी शुरू से ही मेधावी रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके पिता पूर्णाराम ने शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। वे परिवार में सबसे छोटे हैं और पहले सरकारी अधिकारी बने। उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा, 12वीं विज्ञान-गणित से, जोधपुर विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में स्नातक, एलएलबी तथा आईआईएम लखनऊ से मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त की।

वर्ष 2007 में उनका चयन भारतीय वायु सेना में हुआ, जहां उन्होंने वर्ष 2022 तक विंग कमांडर के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद प्रशासनिक सेवा में जाने के अपने लक्ष्य के तहत उन्होंने आरएएस परीक्षा दी और पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की। वर्ष 2024 में उन्होंने प्रशासनिक सेवा जॉइन की। वर्तमान में वे टोडाभीम एसडीएम हैं। इससे पहले वे शाहपुरा, चाकसू और सरमथुरा में भी पदस्थापित रह चुके हैं।

उनकी पत्नी पारुल चौधरी गृहिणी होने के साथ-साथ समाजसेवा से भी जुड़ी हैं और किसानों के हितों के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने नागौरी अश्वगंधा को भौगोलिक संकेतक (GI टैग) दिलवाया, जो कृषि क्षेत्र में दूसरा GI टैग है। इसके साथ ही उन्होंने SIR में भी समय से पहले लक्ष्य प्राप्त कर टोडाभीम को राज्य स्तर पर सम्मान दिलाया।

एसडीएम अमन चौधरी ने अपने गांव अमरपुरा में दो वर्ष पूर्व एक लाइब्रेरी स्थापित कराई, जहां गरीब बच्चे पढ़ाई कर सरकारी सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं। वायु सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वायु सेना अध्यक्ष और कमांडिंग इन चीफ द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। उनकी यह पहल प्रशासनिक सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के संगम का उदाहरण बनकर उभर रही है, जो नशामुक्त समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रस्तुत करती है।

Pratahkal Bureau

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