सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस पर मचेगी धूम: बाघ और अमरूद महोत्सव के संगम से सजेगी उत्सव नगरी
सवाई माधोपुर का 263वां स्थापना दिवस 17-19 जनवरी 2026 तक बाघ और अमरूद महोत्सव के रूप में भव्यता से मनाया जाएगा। जिला कलक्टर काना राम की अध्यक्षता में हुई बैठक में कैलाश खेर की म्यूजिकल नाइट, भव्य शोभायात्रा और अमरूद एक्सपो की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। जानिए इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव और कृषि मेले का पूरा विवरण।

सवाई माधोपुर, 11 जनवरी। अरावली की कंदराओं में बसे ऐतिहासिक शहर सवाई माधोपुर की स्थापना के 263 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस बार जश्न का एक ऐसा सैलाब उमड़ने वाला है, जो परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम का गवाह बनेगा। आगामी 17 से 19 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाला यह त्रिदिवसीय समारोह केवल एक सरकारी आयोजन न रहकर 'जन-उत्सव' का स्वरूप लेगा। जिला कलक्टर काना राम की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व में इस बार स्थापना दिवस को 'बाघ महोत्सव' और पहली बार आयोजित हो रहे 'अमरूद महोत्सव' के एकीकृत कलेवर में पेश किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शहर की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ यहाँ की कृषि संपदा को भी वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करना है।
रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक के दौरान जिला कलक्टर काना राम ने शहर के प्रबुद्धजनों, व्यापारिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान कलक्टर ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह उत्सव प्रशासन का नहीं, बल्कि सवाई माधोपुर के हर नागरिक का अपना पर्व है। उन्होंने आह्वान किया कि उत्सव के दौरान हर घर और हर बाजार रोशनी से जगमगाना चाहिए, गलियों में रंगोलियां सजनी चाहिए और हर चेहरा उल्लास से सराबोर दिखना चाहिए। प्रशासन की मंशा स्पष्ट है कि इन तीन दिनों में सवाई माधोपुर एक जीवंत उत्सव नगरी के रूप में देश-दुनिया के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराए।
इस महोत्सव का सबसे गौरवशाली क्षण 19 जनवरी को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा होगी। जिला कलक्टर ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि वे अपनी पारंपरिक पहचान को गौरवान्वित करते हुए धोती-कुर्ता, साफा, पगड़ी और महिलाएं लहंगा-लुगड़ी जैसे परिधानों में इस यात्रा का हिस्सा बनें। भैरू दरवाजा से शुरू होकर छोटा राजबाग तक जाने वाली यह शोभायात्रा विभिन्न समाजों की सांस्कृतिक विविधता और महिला सशक्तिकरण की एक अद्भुत झांकी प्रस्तुत करेगी। पर्यटकों के आकर्षण के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों और चौराहों को 16 जनवरी से ही दूधिया रोशनी से नहला दिया जाएगा, जबकि खेल प्रेमियों के लिए हैलीपैड खेल मैदान पर पारंपरिक दंगल और खेलों का रोमांच परोसा जाएगा।
आर्थिक और कृषि विकास की दृष्टि से इस वर्ष 'अमरूद महोत्सव' का पदार्पण एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। जिला कलक्टर ने स्पष्ट किया कि सवाई माधोपुर का अमरूद अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है और इस महोत्सव के माध्यम से किसानों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को एक साझा मंच प्रदान किया जाएगा। 18 और 19 जनवरी को दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला 'अमरूद एक्सपो एवं उन्नत कृषि तकनीकी मेला' न केवल किसानों को नई तकनीकों से रूबरू कराएगा, बल्कि इस विशिष्ट फल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
समारोह का चरम 19 जनवरी की शाम को होगा, जब 'रणथम्भौर रागोत्सव' के तहत पद्मश्री कैलाश खेर अपनी जादुई आवाज से दशहरा मैदान में सुरों की महफिल सजाएंगे। यह म्यूजिकल नाइट युवाओं और संगीत प्रेमियों के लिए इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव बुडानिया, अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा, और पर्यटन विभाग के उप निदेशक मधुसूदन सिंह सक्रिय रूप से समन्वय कर रहे हैं। साथ ही, संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष चन्दूजी चौधरी, सर्राफा एसोसिएशन के नरेशबज, होटल एसोसिएशन के अरविंद कुमार जैन, बाबूलाल महावर, बृजेश गर्ग और श्याम सुंदर सिंघल जैसे गणमान्य नागरिकों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी पूर्ण सहभागिता का संकल्प दोहराया है। यह महोत्सव न केवल सवाई माधोपुर की गौरवशाली परंपराओं का संरक्षण करेगा, बल्कि भविष्य के पर्यटन और कृषि व्यापार की नई राहें भी प्रशस्त करेगा।

Pratahkal Bureau
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