सवाई माधोपुर: महिलाओं के लिए 15 दिवसीय जैविक खाद निर्माण प्रशिक्षण शुरू
नाबार्ड और आरुही संस्थान द्वारा जटवाड़ा कला में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जैविक खेती और स्वरोजगार से जोड़ना है।

सवाई माधोपुर के जटवाड़ा कला स्थित अटल सेवा केंद्र में आयोजित सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को संबोधित करते अतिथि एवं प्रशिक्षक।
सवाई माधोपुर, 13 मई। महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर करने और उन्हें स्वरोजगार के सशक्त माध्यमों से जोड़ने की दिशा में सवाई माधोपुर के जटवाड़ा कला में एक महत्वपूर्ण अध्याय का सूत्रपात हुआ है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सौजन्य से आरुही विकास संस्थान द्वारा बुधवार को सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम (एमईडीपी) के अंतर्गत 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सघन प्रशिक्षण का मुख्य ध्येय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जैविक इनपुट एवं उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के निर्माण में पूर्णतः दक्ष बनाना है, ताकि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
इस अभिनव कार्यक्रम का आगाज जिला विकास प्रबंधक पुनित हरित एवं जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक प्रदीप कुमार द्वारा पंचायत परिसर में फलदार पौधों का वृक्षारोपण कर किया गया। यह कृत्य न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, अपितु जैविक खेती के प्रति प्रशासन की गंभीरता और समर्पण को भी रेखांकित करता है। वर्तमान में यह समस्त प्रशिक्षण गतिविधियां जटवाड़ा कला स्थित अटल सेवा केंद्र में संचालित की जा रही हैं। प्रशिक्षण के प्रथम चरण में राजस्थान आजीविका मिशन (राजवीका) से जुड़ी महिलाओं को जैविक कृषि की बारीकियों, विभिन्न लाभकारी सरकारी योजनाओं एवं उद्यमिता के व्यावहारिक सिद्धांतों से अवगत कराया गया। महिलाओं को विषय वस्तु समझाने के लिए दृश्य-श्रव्य माध्यमों, विशेषकर चित्रों एवं वीडियो का सहारा लिया गया, जिसके जरिए जैविक खाद एवं जैविक दवाइयों के उपयोग से होने वाले लाभों को अत्यंत सरल एवं प्रभावी शैली में प्रस्तुत किया गया। इस तकनीकी शिक्षण पद्धति ने संभागियों में भारी उत्साह और जागरूकता का संचार किया है।
आरुही विकास संस्थान के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि आगामी 15 दिनों की अवधि में महिलाओं को पूर्णतः जैविक विधि से खाद निर्माण, कीटनाशक जैविक दवाइयों की तैयारी एवं अन्य संबंधित उत्पाद बनाने का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण मात्र निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं को अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक पेशेवर मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। संस्थान ने यह भी आश्वस्त किया है कि प्रशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार हेतु बैंक ऋण की सुविधा सुलभ कराने के लिए हरसंभव प्रशासनिक प्रयास किए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण अवसर पर आरसीटी के निदेशक नीरज गोपालिया, आजीविका विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक अविनाश कुमार पांडे, संस्था पदाधिकारी अखिलेश सिंह, जिला समन्वयक दिनेश माली, प्रशिक्षण सहयोगी देवराज सैनी तथा प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि मोरध्वज विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह पहल क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और जैविक क्रांति के मेल से एक नए आर्थिक युग का सूत्रपात करने की क्षमता रखती है।

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