सवाई माधोपुर, 30 मई। जल संकट के वैश्विक दौर में भावी पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं वाटरशेड विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को खंडार पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिंगौर कला में "वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026" के तहत जिला स्तरीय वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सरस्वती गौशाला एवं घाटेवाले हनुमानजी के समीप आयोजित इस गरिमामयी समारोह में जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जहां उपस्थित जनसमुदाय ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

इस ऐतिहासिक जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खंडार पंचायत समिति के प्रधान नरेंद्र चौधरी उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपखंड अधिकारी वर्षा मीणा ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत सिंगौर कला के सरपंच रामजीलाल महावर तथा वाटरशेड विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय माथुर सहित विभिन्न प्रशासनिक विभागों के उच्चाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं भारी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।

अभियान का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ कलश यात्रा निकाल कर और पवित्र जल पूजन के साथ किया गया। इसके उपरांत प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए पीपल पूजन, सघन पौधारोपण तथा मूक पक्षियों के लिए परिंडे बांधने जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर उपस्थित समस्त जनों ने सामूहिक रूप से श्रमदान कर जल स्रोतों की साफ-सफाई की तथा पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार, संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के लिए जीवन पर्यंत कार्य करने की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में पूर्व में पूर्ण किए जा चुके जल संरक्षण कार्यों का गहन अवलोकन किया गया तथा स्वच्छता गतिविधियों के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया गया।

प्रशासनिक एवं आधिकारिक पक्ष को मजबूती से सामने रखते हुए उपखंड अधिकारी वर्षा मीणा ने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि "वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता विकसित करने का एक महा-अभियान है। उन्होंने पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने के लिए आमजन से पानी की एक-एक बूंद को सहेजने तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की पुरजोर अपील की। वहीं, तकनीकी व विभागीय पक्ष रखते हुए वाटरशेड विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय माथुर ने वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनभागीदारी के बिना किसी भी जल संरक्षण अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने ग्रामीणों से मानसून पूर्व अधिकाधिक पौधारोपण करने और अपने आस-पास के पारंपरिक जल स्रोतों के अस्तित्व को बचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

समारोह का समापन इस साझा संदेश के साथ हुआ कि जल और पर्यावरण का संरक्षण केवल प्रशासन के बूते संभव नहीं है, बल्कि जब सिंगौर कला जैसी सामुदायिक सहभागिता धरातल पर उतरेगी, तभी यह धरती हरी-भरी और समृद्ध बन सकेगी। यह आयोजन जिले में जल चेतना के एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया है।

Pratahkal Newsroom

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