सवाई माधोपुर। शहर में विकास कार्यों की आड़ में की गई बड़े पैमाने की वृक्ष कटाई अब गंभीर पर्यावरणीय संकट और कानूनी उल्लंघन का मामला बनती जा रही है। पेड़ बचाओ आंदोलन संघर्ष समिति द्वारा किए गए जिओ-ट्रैकिंग व फोटोग्राफी आधारित सर्वे में सामने आया है कि सवाई माधोपुर के विभिन्न प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक परिसरों में कुल 311 पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि 202 पेड़ अभी भी मौजूद हैं, जिन्हें यदि समय रहते नहीं बचाया गया तो उनका भी कटना तय माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी

सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह कटाई माननीय सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन के विपरीत की गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में तय किया है कि 50 से अधिक पेड़ों की कटाई के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee – CEC) की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। इसके अलावा सवाई माधोपुर रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के निकटवर्ती क्षेत्र में आता है, ऐसे में यहां स्थानीय वन अधिकारियों की वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया जाना भी जरूरी था। सर्वे के अनुसार न तो CEC की अनुमति ली गई और न ही आवश्यक वन विभागीय स्वीकृति प्राप्त की गई।

‘पेड़ों की हत्या, मनुष्यों की हत्या से भी गंभीर’

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह टिप्पणी की है कि:

“बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा जाना मनुष्यों की हत्या से भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इसका प्रभाव केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता।”

इसके बावजूद सवाई माधोपुर में सैकड़ों पेड़ों को बिना वैधानिक प्रक्रिया के काट दिया गया।

न कोई पर्यावरणीय आकलन, न वैकल्पिक समाधान

हैरानी की बात यह भी है कि पेड़ों की कटाई से पहले कोई पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) नहीं किया गया। न यह आंका गया कि इससे तापमान, वायु प्रदूषण, नमी और आमजन के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा। जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि कई स्थानों पर सीवरेज लाइन, उसके चैंबर, बिजली के ट्रांसफार्मर और खंभे पहले से ही रोड सीमा में मौजूद हैं, इसके बावजूद सबसे पहले पेड़ों को ही हटाया गया।

कहां-कहां कितने पेड़ कटे: सर्वे का विवरण
  • हम्मीर सर्किल से आलनपुर सर्किल तक – 211 पेड़
  • पुलिस लाइन चौराहा से पुराना ट्रक यूनियन – 26
  • पुराना ट्रक यूनियन से जामा मस्जिद, बजरिया – 11
  • पुराना ट्रक यूनियन से डॉ. अंबेडकर सर्किल – 16
  • डॉ. अंबेडकर सर्किल से गणेश होटल, सिविल लाइन – 17
  • ईएसआईसी डिस्पेंसरी परिसर – 16
  • दशहरा मैदान – 14

काटे गए पेड़ों में नीम, शीशम, पीपल, बेल, गुलमोहर, करंज, आम, अशोक, आड़ू, चमेली ट्री और अंब्रेला ट्री जैसी छायादार व औषधीय प्रजातियां शामिल हैं।

15–15 फीट तने की गोलाई, फिर इतनी लकड़ी कहां गई?

सर्वे में यह तथ्य भी सामने आया है कि कई पेड़ों की तने की गोलाई 15–15 फीट तक थी। ऐसे में बड़ी मात्रा में लकड़ी का स्टॉक होना स्वाभाविक है, लेकिन पीडब्ल्यूडी के डाक बंगला स्थित स्टॉक डिपो में रखी गई लकड़ी, वास्तविक कटाई के अनुपात में नहीं पाई गई। जिससे साफ है कि लकड़ी की अवैध लदान और बिक्री की है।

202 पेड़ अब भी बचे, आख़िरी मौका

सर्वे के अनुसार शहर के विभिन्न हिस्सों में अभी भी 202 पेड़ खड़े हैं, जिनमें हम्मीर सर्किल, आलनपुर सर्किल, बजरिया, सिविल लाइन और बरवाड़ा क्षेत्र शामिल हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इन्हें तुरंत संरक्षण नहीं दिया गया, तो शहर को आने वाले वर्षों में इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

स्वास्थ्य, तापमान और प्रदूषण पर सीधा असर
  • विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी कटाई से शहर का तापमान 2 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है।
  • हवा में धूल और जहरीले कण बढ़ेंगे, नमी घटेगी और दमा, एलर्जी व श्वसन रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
  • इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ेगा।
स्थाई लोक अदालत में मामला लंबित

संघर्ष समिति ने बताया कि पेड़ों की कटाई से जुड़ा यह मामला माननीय स्थाई लोक अदालत में विचाराधीन है, इसके बावजूद कटाई की गई, जो न्यायिक प्रक्रिया की भी अनदेखी मानी जा रही है। फिलहाल यह मामला केवल पर्यावरण संरक्षण का नहीं, बल्कि कानून, जनस्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा सवाल बन चुका है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

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