सवाई माधोपुर। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के इतिहास में 18 जनवरी 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। जिले के 263वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित देश के पहले 'अमरूद महोत्सव एवं कृषि तकनीकी मेला-2026' ने न केवल क्षेत्र के किसानों को एक नई वैश्विक पहचान दी है, बल्कि उनकी आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोल दिए हैं। दशहरा मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि यह महोत्सव महज एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में बदलाव लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उनके साथ मंच पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जिले के विकास के लिए बड़ी घोषणाओं की झड़ी लगा दी।

महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से लगने वाले अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर रही। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि अमरूद भले ही एक सुलभ फल हो, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ अद्वितीय हैं। इस महोत्सव के माध्यम से अमरूद से बनने वाले उत्पाद जैसे अचार, जूस, पल्प और मिठाइयों का प्रदर्शन कर इसकी वैश्विक मांग को बढ़ाने का प्रयास किया गया है। बिरला ने जोर देकर कहा कि जब कृषि उत्पाद का मूल्य संवर्धन (Value Addition) स्थानीय स्तर पर होगा, तभी किसान वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा।





कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया कि राजस्थान के कुल 14 हजार हेक्टेयर अमरूद बागानों में से 11 हजार हेक्टेयर अकेले सवाई माधोपुर जिले में हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सवाई माधोपुर का अमरूद अब यहीं खपेगा और इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार की है। वर्तमान में इस फल से होने वाली 600-700 करोड़ रुपये की वार्षिक आय को बढ़ाकर 1500-1600 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. मीणा ने क्षेत्र के विकास के लिए 600 करोड़ रुपये के कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें सूरवाल बांध के अतिरिक्त पानी को बनास नदी में छोड़ने के लिए 110 करोड़ रुपये का चैनल निर्माण भी शामिल है, जिससे किसानों को सिंचाई में बड़ी राहत मिलेगी।

संशोधित पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चंबल) योजना, जिसे पूर्व में ईआरसीपी के नाम से जाना जाता था, पर चर्चा करते हुए मंत्री डॉ. मीणा ने कहा कि इसका सर्वाधिक लाभ सवाई माधोपुर को मिलेगा। डूंगरी बांध परियोजना के माध्यम से जिले का सिंचित क्षेत्र बढ़कर 1.60 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। उन्होंने विस्थापित होने वाले 9 गांवों के निवासियों को पूर्ण बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का आश्वासन दिया और बताया कि केंद्र सरकार ने इस पूरी योजना के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया है। महोत्सव के दौरान लगी 250 स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए अतिथियों ने किसानों को 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' और 'मंगला पशु बीमा' जैसी योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।

उद्घाटन समारोह में जिला कलेक्टर काना राम और पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने भी अपने विचार रखे और क्षेत्र के विकास में इस महोत्सव की भूमिका को रेखांकित किया। स्थानीय पद दंगल कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, व्यापारियों और विशेष रूप से दूर-दराज से आए अन्नदाताओं का आभार व्यक्त किया। यह महोत्सव स्पष्ट रूप से संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में सवाई माधोपुर का अमरूद केवल फल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की खुशहाली का सबसे बड़ा ब्रांड बनने जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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