सवाई माधोपुर के मानटाउन स्कूल खेल मैदान में आयोजित रणथंभौर शिल्प कला महोत्सव की रौनक उस समय सामाजिक जागरूकता के उल्लास में बदल गई, जब हस्तशिल्प की कलात्मकता के बीच समाज की कुरीतियों के विरुद्ध एक सशक्त स्वर सुनाई दिया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के अध्यक्ष व सचिव के दिशा-निर्देशानुसार, सोमवार को महोत्सव परिसर में एक विशेष विधिक सेवा स्टॉल के माध्यम से आमजन को बाल विवाह जैसी कुप्रथा और महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा के प्रति जागरूक किया गया। यह आयोजन मात्र एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि समाज के संवेदनशील मुद्दों पर प्रहार करने और संवैधानिक अधिकारों को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रभावी मंच बन गया।

आयोजन के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कनिष्ठ सहायक दीपक नामा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बताया कि किस प्रकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में 4 दिसंबर 2025 से 'बाल विवाह मुक्त भारत' हेतु 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के सुनहरे भविष्य पर लगने वाला ग्रहण है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों को साझा करते हुए इसके कानूनी पक्षों पर प्रकाश डाला और बताया कि बाल विवाह के मामलों में कठोर सजा के प्रावधान मौजूद हैं। साथ ही, उन्होंने बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 की उपयोगिता समझाते हुए वन स्टॉप सेंटर और महिला अधिकारिता विभाग की योजनाओं के महत्व को रेखांकित किया, ताकि संकट के समय कोई भी पीड़ित स्वयं को असहाय न समझे।

इसी क्रम में, सामाजिक न्याय की इस धारा को आगे बढ़ाते हुए कनिष्ठ सहायक अमित कुमार भूरिया ने ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित 'नई चेतना 4.0' अभियान के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम यानी 'पोश एक्ट' 2013 के विभिन्न प्रावधानों से आमजन को अवगत कराया। भूरिया ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आंतरिक और स्थानीय परिवाद समितियों की भूमिका और शिकायत दर्ज करने की वैधानिक प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण हर स्तर पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है। महोत्सव के इस विधिक मंच ने न केवल शिल्प और संस्कृति का संरक्षण किया, बल्कि एक न्यायपूर्ण और सुरक्षित समाज की नींव रखने का भी पुरजोर संदेश दिया, जिसे स्थानीय नागरिकों ने बेहद सराहनीय बताया।

Pratahkal Newsroom

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