सवाई माधोपुर। सत्ता के गलियारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक आज कांग्रेस के 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की गूँज सुनाई दी। सवाई माधोपुर के अंबेडकर सर्किल पर रविवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जहाँ राजनीति और जनहित के मुद्दे एक मंच पर आकर खड़े हो गए। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित एकदिवसीय उपवास कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की तथाकथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया गया। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही जिला अध्यक्ष एवं विधायक इंदिरा मीणा ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मनरेगा कोई खैरात नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की धड़कन है, जिसे सत्ता के अहंकार में कुचलने की कोशिश की जा रही है।

आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि यहाँ जिले के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा रहा। जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, राष्ट्रीय सचिव दानिश अबरार, उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा और जिला प्रमुख सुदामा देवी मीणा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा कर सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों पर जमकर प्रहार किया। विधायक इंदिरा मीणा ने जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी लहजे में कहा कि यूपीए सरकार के दौर में शुरू हुई इस क्रांतिकारी योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत किया था, लेकिन वर्तमान में इसके बजट में की जा रही निरंतर कटौती गरीबों के पेट पर लात मारने के समान है। उन्होंने भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी को ग्रामीण परिवारों के आर्थिक संकट का मुख्य कारण बताते हुए इसे सरकार की सोची-समझी साजिश करार दिया।

इस उपवास कार्यक्रम में प्रधान देव पाल, प्रदेश सेक्रेटरी लईक अहमद सहित कांग्रेस के विभिन्न पदाधिकारियों ने भाग लिया और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मनरेगा मजदूरों का कानूनी अधिकार है और कांग्रेस पार्टी इस हक की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक लड़ने को तैयार है। मीडिया प्रभारी अमन खान ने बताया कि यह आंदोलन केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ब्लॉक और पंचायत स्तर तक ले जाने का संकल्प लिया गया है। कार्यक्रम में समस्त ब्लॉक अध्यक्ष, नगर परिषद सदस्य, पंचायत सदस्य, समस्त पार्षद गण, जिला NSUI के पदाधिकारी, अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ता और भारी संख्या में ग्रामीण श्रमिक उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में कार्य दिवस बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई। यह एकदिवसीय उपवास न केवल एक राजनीतिक विरोध था, बल्कि उन करोड़ों हाथों के सम्मान की लड़ाई थी जो राष्ट्र निर्माण में अपना पसीना बहाते हैं।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story