बरसात के मौसम में बच्चों को डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने और दस्त जनित मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में "स्टॉप डायरिया कैंपेन" का शुभारंभ कर दिया है। 16 जून से 31 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों और उनके परिवारों को डायरिया की रोकथाम, समय पर उपचार तथा स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि अभियान की थीम "डायरिया की रोकथाम, सफाई और ओआरएस से रखें अपना ध्यान" निर्धारित की गई है। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को दस्त रोग से बचाना तथा समय पर उपचार उपलब्ध कराकर गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकना है।

अभियान के दौरान आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवारों से संपर्क करेंगी। स्वास्थ्य कर्मी लोगों को दस्त रोग की पहचान, बचाव और उपचार की जानकारी देंगे। साथ ही पांच वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के पैकेट और जिंक की गोलियां वितरित की जाएंगी तथा उनके सही उपयोग की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में ओआरएस कॉर्नर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों पर दस्त से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों को तत्काल परामर्श, ओआरएस घोल और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही चिकित्सा संस्थानों में ओआरएस और जिंक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की गई है।

अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को हाथ धोने की सही विधि, स्वच्छ पेयजल के उपयोग, भोजन को ढंककर रखने और खुले में शौच से बचने जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग यह संदेश भी देगा कि दस्त होने पर बच्चे का भोजन और स्तनपान जारी रखा जाए तथा निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया जाए।

डॉ. जेमिनी ने कहा कि दस्त को सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में दस्त की शुरुआत होते ही ओआरएस घोल देना और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार जिंक की गोलियां देना आवश्यक है। समय पर उपचार और स्वच्छता संबंधी सावधानियां अपनाकर डायरिया से होने वाले गंभीर परिणामों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा अधिकारियों, आशा सहयोगिनियों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अन्य संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए हैं, ताकि दस्त नियंत्रण और बचाव का संदेश जिले के प्रत्येक परिवार तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

जिले में अभियान के लिए शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 लाख 83 हजार 756 बच्चों को चिन्हित किया गया है। इनमें बामनवास ब्लॉक में 25,563, बोली में 19,879, चौथ का बरवाड़ा में 15,825, गंगापुर सिटी में 31,229, खंडार में 22,583, मलारना डूंगर में 15,873, सवाई माधोपुर ब्लॉक में 21,584 तथा शहरी क्षेत्र में 33,219 बच्चों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिलेभर में शुरू हुआ यह विशेष अभियान न केवल बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि स्वच्छता, जागरूकता और समय पर उपचार के माध्यम से डायरिया जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की व्यापक पहल भी साबित होगा।

Pratahkal Bureau

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