सवाई माधोपुर में भगवान रंगनाथ और माता गोदा का दिव्य विवाह, वैदिक विधि से संपन्न
सवाई माधोपुर के श्री रंगनाथ मंदिर में ब्रह्मोत्सव के तहत भगवान रंगनाथ और माता गोदा का दिव्य विवाह वैदिक रीति से संपन्न हुआ। मथुरा, उज्जैन और दक्षिण भारत के आचार्यों ने मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्में कराईं।

तस्वीर में सवाई माधोपुर स्थित श्री रंगनाथ मंदिर में ब्रह्मोत्सव के दौरान श्री श्री 1008 डॉक्टर माधव प्रप्पन्नाचार्य जी महाराज और अन्य श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े नजर आ रहे हैं।
सवाई माधोपुर शहर स्थित श्री रंगनाथ मंदिर में चल रहे भव्य ब्रह्मोत्सव के तहत माता गोदा और भगवान रंगनाथ का दिव्य विवाह कल्याणोत्सव वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। श्री श्री 1008 डॉक्टर माधव प्रप्पन्नाचार्य जी महाराज (रामानुज कोट, उज्जैन वाले) के पावन सानिध्य में आयोजित विवाह समारोह में भगवान रंगनाथ जी की शाही निकासी के साथ भव्य बारात निकाली गई। इसके बाद मथुरा, उज्जैन और दक्षिण भारत से आए प्रकांड विद्वान आचार्यों और पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं।
उत्सव के दौरान भगवान रंगनाथ द्वारा वधू पक्ष के घर के द्वार पर पारंपरिक तोरण मारने की रस्म भी पूरी गरिमा के साथ निभाई गई। मंदिर परिसर में 17 सितंबर से शुरू हुए आठ दिवसीय आयोजन 17 से 24 सितंबर के दौरान तीन दिवसीय वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मेहंदी, हल्दी, सगाई और गोद भराई सहित कई मांगलिक रस्में निभाई गईं। रंगनाथ महिला मंडल की ओर से प्रतिदिन बन्ने-बन्नी के गीत गाए गए, भेंट बांटी गई और सभी रस्में निभाई गईं।
मंदिर से जुड़े सुरेश गर्ग पढ़ाने वाले, राजेश गोयल, गिर्राज मलारना वाले और द्वारका मित्तल ने बताया कि दिव्य विवाह में वर पक्ष यानी भगवान रंगनाथ की ओर से श्री पुरुषोत्तम जी गोयल, आनंद जी गोयल एवं अशोक कुमार गोयल (पिंटू), प्रहलाद रायजी और घनश्याम गर्ग ने सभी व्यवस्थाएं और जिम्मेदारियां संभालीं। वहीं, वधू पक्ष यानी माता गोदा की ओर से श्री महावीर, संजय जी एवं अक्षय जी सर्राफ ने कन्या पक्ष के दायित्वों का निर्वहन किया।
ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान रंगनाथ को नगर भ्रमण यानी नगर परिक्रमा भी कराई जा रही है। इसके बाद मंदिर में विशेष गोष्ठी और महाआरती का आयोजन किया जाता है तथा भक्तों के बीच भारी मात्रा में प्रसाद वितरित किया जाता है।
माता गोदा और भगवान रंगनाथ के इस विवाह के पीछे दक्षिण भारत की भक्तिमयी कथा जुड़ी है। माता गोदा को दक्षिण भारत में आण्डाल के नाम से जाना जाता है और उन्हें साक्षात भूदेवी का अवतार माना जाता है। कथा के अनुसार गोदा जी का प्राकट्य दक्षिण भारत के श्रीविल्लीपुत्तुर में पेरियालवार (विष्णुचित्त) नामक परम विष्णु भक्त के आंगन में तुलसी के पौधे के नीचे हुआ था।
गोदा जी बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण (रंगनाथ) के प्रेम में डूबी रहती थीं। भगवान के लिए बनाई जाने वाली फूलों की माला को वह पहले स्वयं पहनकर शीशे में देखती थीं कि वह भगवान के योग्य लग रही है या नहीं। इसके बाद वह माला रख देती थीं और उनके पिता अनजाने में वही माला भगवान को अर्पित कर देते थे।
एक दिन पिता ने गोदा जी को माला पहनते देख लिया और उसे अशुद्ध मानकर भगवान को अर्पित नहीं किया। उसी रात भगवान रंगनाथ ने स्वप्न में आकर कहा कि उन्हें गोदा द्वारा पहनी गई माला ही सबसे प्रिय है। इसके बाद उनका नाम ‘आण्डाल’ पड़ा, जिसका अर्थ बताया गया है कि जो भगवान पर शासन करे।
गोदा जी ने दृढ़ संकल्प लिया था कि वह केवल भगवान रंगनाथ से ही विवाह करेंगी। उनकी अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान रंगनाथ ने उन्हें श्रीरंगम, तमिलनाडु बुलाया। वहां पहुंचते ही माता गोदा दिव्य ज्योति के रूप में भगवान रंगनाथ के विग्रह में समा गईं और हमेशा के लिए उनकी अर्धांगिनी बन गईं।
इसी कथा के आधार पर हर साल देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान रंगनाथ और माता गोदा के इस विवाह को कल्याणोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इसे आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक माना जाता है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
