महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने तथा कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर द्वारा गुरुवार को एडीआर सेंटर में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पोश अधिनियम), डॉन यूनिट एवं आशा यूनिट के संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर समीक्षा गौतम ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित, सम्मानजनक एवं समान अवसरों वाला वातावरण उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्था, कार्यालय और नियोक्ता का नैतिक तथा कानूनी दायित्व है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का लैंगिक उत्पीड़न महिलाओं की गरिमा, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिसके प्रभावी निवारण के लिए पोश अधिनियम, 2013 महत्वपूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

समीक्षा गौतम ने पोश अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। यह समिति लैंगिक उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करती है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, शिकायतों के निस्तारण की समय-सीमा तथा पीड़ित महिलाओं को उपलब्ध कानूनी अधिकारों और संरक्षण संबंधी प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान पैनल अधिवक्ता अभय कुमार गुप्ता ने नालसा की ‘ड्रग अवेयरनेस एंड वैलनेस नेविगेशन फॉर ए ड्रग फ्री इंडिया स्कीम-2025’ के तहत डॉन यूनिट की कार्यप्रणाली तथा एनडीपीएस एक्ट, 1985 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नशा मुक्ति और जागरूकता से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

वहीं, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल अक्षय राजावत ने आशा यूनिट की कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी देते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, बाल विवाह की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, शिकायतों के निस्तारण में विधिक सेवा प्राधिकरणों एवं विधिक सेवा समितियों की भूमिका तथा संबंधित मामलों में दंडात्मक प्रावधानों के बारे में बताया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डिप्टी एलएडीसी वीरेन्द्र कुमार वर्मा, उप निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मनोज कुमार गहलोत, ब्लॉक सीएमएचओ नवल किशोर मीना, सब इंस्पेक्टर रामस्वरूप मीणा सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों, पैनल अधिवक्ताओं, अधिकार मित्रों, आशा सहयोगिनियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम ने भाग लिया। कार्यक्रम ने महिलाओं की सुरक्षा, नशा मुक्ति जागरूकता और बाल विवाह रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कानूनी समझ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Pratahkal Bureau

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