सौर ऊर्जा से संवरी बनवारीलाल मीणा की किस्मत: पीएम-कुसुम योजना ने खेती को बनाया खुशहाल और आत्मनिर्भर
सवाई माधोपुर के महापुरा में पीएम-कुसुम योजना ने कैसे बदली किसान की तकदीर? डीजल-बिजली के खर्च से मुक्ति और बढ़ती पैदावार की प्रेरणादायक सफलता की कहानी, जिसने खेती को बना दिया है आधुनिक और आत्मनिर्भर। जानें कैसे सौर ऊर्जा से संवर रही है किसानों की आय।

सवाई माधोपुर के महापुरा गांव में किसान बनवारीलाल मीणा अपने खेत पर स्थापित 5 एचपी सोलर पंप के माध्यम से फसलों की सिंचाई करते हुए, जिससे डीजल-बिजली खर्च समाप्त हुआ।
सवाई माधोपुर, 24 जून। कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीक का समावेश किस प्रकार एक किसान की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकता है, इसकी जीवंत मिसाल सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा उपखंड की ग्राम पंचायत महापुरा में देखने को मिल रही है। यहाँ के प्रगतिशील युवा किसान बनवारीलाल पुत्र अर्जुन मीणा के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उनके खेत पर स्थापित 5 एचपी का सोलर पंप अब खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदलकर समृद्धि का नया आधार बन गया है।
लगभग 1.5 हेक्टेयर भूमि के स्वामी बनवारीलाल को पूर्व में सिंचाई की अनिश्चितता और सिंचाई के साधनों पर होने वाले अत्यधिक खर्च के कारण भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक गिर्राज प्रसाद कोठारी के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने पीएम-कुसुम योजना के तहत आवेदन करने का निर्णय लिया। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 2.92 लाख रुपये थी, जिस पर उन्हें 60 प्रतिशत का सरकारी अनुदान प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, जनजाति वर्ग से होने के कारण उन्हें 45 हजार रुपये की विशेष सब्सिडी का भी लाभ मिला। परिणामस्वरुप, मात्र 84 हजार 221 रुपये के कृषक अंशदान के साथ उनके खेत पर अत्याधुनिक सोलर पंप संयंत्र स्थापित हो सका।
इस बदलाव के प्रभाव पर चर्चा करते हुए बनवारीलाल बताते हैं कि सोलर पंप ने खेती की पूरी तस्वीर बदल दी है। डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण लाभ फसलों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में पानी मिलने के रूप में सामने आया है, जिससे पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हाल ही में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर-2026 में अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए उन्होंने अन्य किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
महापुरा ग्राम पंचायत की यह सफलता अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बनकर उभरी है। ब्लॉक सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक लगभग 170 किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं, जबकि 150 से अधिक किसान इससे जुड़ने की प्रक्रिया में हैं। स्पष्ट है कि सौर ऊर्जा केवल खेतों तक पानी ही नहीं पहुंचा रही, बल्कि किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया अध्याय भी लिख रही है।

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