राजस्थान में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। जहां सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से गर्मी से बचाव को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं, वहीं धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। पानी, बिजली, सफाई और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे दावों की वास्तविकता सामने आ रही है। इसी कड़ी में सवाई माधोपुर जिले का निमली खुर्द गांव सरकारी और प्रशासनिक दावों की पोल खोलता दिखाई दे रहा है, जहां ग्रामीण वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित, जिला मुख्यालय की निकटवर्ती ग्राम पंचायत जीनापुर, विधानसभा खंडार का गांव नीमली खुर्द आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आम आदमी और पशुओं के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।

निमली खुर्द गांव के वार्ड पार्षद कमलेश योगी ने बताया कि विगत चार-पांच वर्षों से गांव में पानी की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व जल जीवन मिशन और हर घर जल योजना के तहत गांव में एक पानी की टंकी का निर्माण किया गया था, जिसके संचालन के लिए दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए थे। टंकी और ट्यूबवेल तैयार होने के बाद जलदाय विभाग के कर्मचारी आए, बोरिंग से टंकी को भरवाकर विधिवत उद्घाटन करवा कर चले गए। इसके बाद आज तक किसी जनप्रतिनिधि या जलदाय विभाग के कर्मचारी अथवा अधिकारी ने आकर यह नहीं देखा कि सरकारी बोरिंग और टंकी की स्थिति क्या है। पार्षद के अनुसार गांव की महिलाओं को भीषण गर्मी में दूर-दराज तक पैदल जाकर पीने का पानी लाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार दो साल पहले स्थापित टंकी और बोरिंग मुश्किल से एक महीने तक ही संचालित रहे और उसके बाद बंद हो गए। इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया तथा क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र गोठवाल को भी समस्या से अवगत कराते हुए पेयजल व्यवस्था की मांग की गई, लेकिन अब तक किसी स्तर पर समाधान नहीं किया गया।

ग्रामीण उमा शंकर गुर्जर ने बताया कि गांव में पिछले चार-पांच वर्षों से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गांव में सरकारी जलस्रोत पूरी तरह बंद और खराब हालत में पड़े हैं। उनका कहना था कि देश को आजाद हुए सत्तर वर्ष हो गए, लेकिन नीमली गांव की महिलाएं आज भी दो से ढाई किलोमीटर दूर सीता माता क्षेत्र और अन्य खेतों में स्थित निजी बोरिंग से सिर पर पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि गांव में पानी के अभाव के कारण उनके पालतू पशु भी भीषण गर्मी में पानी के लिए तड़प रहे हैं।

उमा शंकर गुर्जर ने यह भी कहा कि सरकार और विधायक हर वर्ष गांवों में नए हैंडपंप लगाने और खराब हैंडपंपों को ठीक करने के लिए अभियान चलाते हैं, लेकिन नीमली गांव में आज तक एक भी हैंडपंप नहीं लगाया गया। उन्होंने बताया कि गांव के पास ही श्मशान घाट स्थित है, ऐसे में अंतिम संस्कार के बाद भी पानी की जरूरत के लिए उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है।

गांव की महिला ममता ने बताया कि गांव के लोग प्यासे मरने को मजबूर हैं और पीने के पानी का कोई निर्धारित स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने परिवार और पशुओं के लिए दूर खेतों में जाकर पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। महिला ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच यदि गांव में आगजनी की घटना हो जाए तो उसे बुझाने का भी कोई साधन उपलब्ध नहीं है। जब पीने का पानी नहीं है, तो आग बुझाना कैसे संभव होगा।

ग्रामीण महिलाओं के अनुसार गांव में पीने सहित अन्य कार्यों के लिए पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अनुरोध किया है कि गांव में पानी की इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए।

इस मामले में जलदाय विभाग के सहायक अभियंता हरकेश मीणा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह टंकी जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई है। उन्होंने बताया कि वे इस संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे और जानकारी के आधार पर जो भी उचित समाधान होगा, वह किया जाएगा।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद उनकी निगरानी और रखरखाव की कमी किस तरह ग्रामीणों के जीवन को संकट में डाल रही है।

Pratahkal Bureau

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