सवाई माधोपुर, 27 मई 2026। सवाई माधोपुर की स्थायी लोक अदालत ने नगर परिषद की एक मनमानीपूर्ण कार्रवाई पर कड़ा प्रहार करते हुए ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने बिना किसी पूर्व नोटिस के प्रार्थिया वसुधा राजावत की चारदीवारी को ध्वस्त करने की नगर परिषद की कार्यवाही को पूर्णतः अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत करार दिया है। इस निर्णय के तहत अदालत ने नगर परिषद को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे प्रार्थिया की तोड़ी गई चारदीवारी का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करें, अथवा एक माह के भीतर प्रार्थिया को 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें।

न्यायिक प्रक्रिया के दौरान, प्रार्थिया वसुधा राजावत की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता भंवर सिंह जादौन ने अदालत को अवगत कराया कि नगर परिषद ने किसी भी वैधानिक नोटिस या विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना उनकी बाउण्ड्री-वॉल को ध्वस्त कर दिया, जिसके कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक संताप झेलना पड़ा। वहीं, नगर परिषद का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संदीप शर्मा इस दावे को पुष्ट करने में पूरी तरह विफल रहे कि प्रार्थिया की चारदीवारी किसी सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की श्रेणी में आती थी।

सुनवाई के दौरान स्थायी लोक अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से पूर्व संबंधित व्यक्ति को उचित नोटिस देना और सुनवाई का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है। बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए की गई यह विध्वंसकारी कार्रवाई कानून की नजर में अनुचित है। अदालत ने नगर परिषद की इस कार्रवाई को 'सेवा दोष' (Deficiency in Service) मानते हुए यह आदेश पारित किया है। यह फैसला सरकारी संस्थाओं द्वारा मनमाने ढंग से की जाने वाली कार्रवाइयों के खिलाफ एक नजीर बन गया है, जो स्पष्ट करता है कि किसी भी नागरिक की संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही किया जा सकता है।

Pratahkal Newsroom

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