सवाई माधोपुर, 6 अगस्त। नाबार्ड समर्थित एलईडीपी के अंतर्गत आरुही विकास संस्थान द्वारा संचालित “क्षीर समृद्धि महिला डेयरी विकास कार्यक्रम” के तृतीय एवं चतुर्थ बैच की महिलाओं के लिए आयोजित दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह रहे, जबकि जिला विकास प्रबंधक पुनीत हरित तथा आरएसईटी निदेशक नीरज कुमार गोपालिया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। आरुही विकास संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिलेश सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह परियोजना ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, दुग्ध उत्पाद निर्माण, उद्यमिता विकास तथा बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसके बाद संस्थान के रीजनल हेड लवकुश यादव ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, पनीर, घी, दही, छाछ एवं अन्य दुग्ध उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, व्यवसाय प्रबंधन तथा बाजार से जुड़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को स्वरोजगार, बाजार से जोड़ने तथा स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना भी है।

मुख्य अतिथि शारदा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जंगल से जुड़े ग्रामीण जनों की आजीविका को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए दूध एवं दुग्ध उत्पाद, शुद्ध देशी घी, पनीर, छाछ, लस्सी तथा अन्य स्थानीय उत्पादों को रणथम्भौर आने वाले देशी एवं विदेशी पर्यटकों तक पहुँचाया जाए तो इससे ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि वन विभाग, नाबार्ड, आरुही विकास संस्थान तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका एवं पर्यटन को जोड़ने वाला एक प्रेरणादायी मॉडल बन सकती है।

जिला विकास प्रबंधक पुनीत हरित ने कहा कि एलईडीपी का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपनाकर स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का आह्वान किया।

आरएसईटीआई के निदेशक नीरज कुमार गोपालिया ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, बेहतर पैकेजिंग, उचित मूल्य निर्धारण तथा प्रभावी विपणन किसी भी उद्यम की सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान तृतीय एवं चतुर्थ बैच की सभी प्रशिक्षित महिलाओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। रिफ्रेशर प्रशिक्षण में डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, बाजार संपर्क, व्यवसाय प्रबंधन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। इस अवसर पर आरुही विकास संस्थान के पदाधिकारी, परियोजना टीम, प्रशिक्षकगण, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए महिला डेयरी उद्यमिता, बाजार से जुड़ाव तथा जंगल से जुड़े ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने का संकल्प लिया गया।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur

नाम: हरक चंद जैन

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)

परिचय

हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:

  • दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
  • अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।

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