सवाई माधोपुर में सरसों की फसल पर कीटों का प्रकोप, कृषि विभाग ने दी सलाह
कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों को पेंटेड बग और आरा मक्खी से बचाव के तकनीकी उपाय बताए।

सवाई माधोपुर में कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों में पहुंचकर सरसों की फसल का निरीक्षण किया।
सवाई माधोपुर जिले में सरसों की फसल पर शुरुआती अवस्था में पेंटेड बग (चितकबरा कीट) और आरा मक्खी का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। जिले में 1 लाख 70 हजार हैक्टर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की गई है। फसल को कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग ने खेतों में पहुंचकर निरीक्षण शुरू कर दिया है। साथ ही किसानों को कीटों की पहचान, नुकसान के लक्षण और प्रभावी नियंत्रण के उपायों की जानकारी देकर सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
इसी क्रम में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीना के नेतृत्व में चौथ का बरवाड़ा ब्लॉक के सहायक कृषि अधिकारी विजय जैन और कृषि पर्यवेक्षक डिडायच हस्तीमल मीना की टीम ने चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के डिडायच, बन्देडिया, भेड़ोला सहित विभिन्न गांवों में किसानों के खेतों पर पहुंचकर सरसों की फसल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने फसल में कीटों की मौजूदगी और उनके प्रकोप से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए नियंत्रण के तकनीकी उपाय बताए।
संयुक्त निदेशक लखपत लाल मीना ने बताया कि सरसों की फसल की शुरुआती अवस्था में पेंटेड बग और आरा मक्खी दोनों का प्रकोप विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है। पेंटेड बग का हमला अंकुरण के तुरंत बाद शुरू हो जाता है, जबकि आरा मक्खी का प्रकोप अंकुरण के लगभग 7 से 10 दिन बाद दिखाई देने लगता है। समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो नवजात पौधों की संख्या घटने के साथ फसल की बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है।
पेंटेड बग यानी चितकबरा कीट काले रंग का होता है और इसके शरीर पर लाल एवं पीले रंग के निशान पाए जाते हैं। इसके शिशु और वयस्क कीट पौधों की पत्तियों तथा कोमल हिस्सों से रस चूसते हैं। इसके परिणामस्वरूप पौधे पीले पड़कर मुरझाने और सूखने लगते हैं। प्रकोप अधिक होने पर नवजात पौधे पूरी तरह नष्ट भी हो सकते हैं।
वहीं, आरा मक्खी (सॉफ्लाई) की सूंडियां हरे अथवा धूसर रंग की होती हैं। शुरुआत में ये पत्तियों के किनारों को कुतरती हैं और बाद में पूरी पत्तियों को खाकर केवल डंठल एवं नसें छोड़ देती हैं। इसका अधिक प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होता है।
कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि खेतों में फसल अवशेष और खरपतवार नष्ट करें। प्रमाणित बीज का उपयोग करें तथा अनुशंसित बीजोपचार के बाद ही बुवाई करें। अंकुरण के तुरंत बाद से फसल की नियमित निगरानी शुरू कर दें और विशेष रूप से पहले 25-30 दिनों तक सतर्क रहें।
पेंटेड बग के नियंत्रण के लिए खेत और मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखने तथा कीटों के समूह दिखाई देने पर उन्हें एकत्रित कर नष्ट करने की सलाह दी गई है। आरा मक्खी की सूंडियों को सुबह एवं शाम हाथ से एकत्रित कर नष्ट करना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार फसल में हल्की सिंचाई करने से भी आरा मक्खी की सूंडियों का प्रकोप कम करने में सहायता मिलती है। दोनों कीटों के नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5ः डस्ट का 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करने की सलाह दी गई है।
पेंटेड बग का प्रकोप अधिक होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 0.3 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने को कहा गया है। इसी तरह आरा मक्खी का प्रकोप बढ़ने पर मैलाथियान 50 ईसी की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने कीटनाशकों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने पर भी जोर दिया। कीटनाशी का छिड़काव और भुरकाव सुबह अथवा शाम के समय करने, निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का उपयोग नहीं करने तथा छिड़काव के दौरान सुरक्षा उपकरण पहनने की हिदायत दी गई है। किसानों से कीटनाशक खरीदते समय बिल अवश्य लेने को भी कहा गया है।
कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि सरसों की फसल की शुरुआती अवस्था को गंभीरता से लें। फसल में कीटों के लक्षण दिखाई देते ही नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक अथवा कृषि अधिकारी से संपर्क कर तकनीकी सलाह प्राप्त करें। समय पर कीटों की पहचान और अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने से सरसों की फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
