सवाई माधोपुर में निर्माण कार्यों पर लगने वाले श्रमिक कल्याण उपकर को लेकर श्रम विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (श्रमिक) कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 के तहत 27 जुलाई 2009 के बाद निर्मित सरकारी, व्यावसायिक और 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निजी आवासीय भवनों पर निर्माण लागत का एक प्रतिशत उपकर (सेस) जमा कराना अनिवार्य किया गया है।

इस उपकर से प्राप्त राशि का उपयोग निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर किया जाता है। सहायक श्रम आयुक्त राकेश कुमार मीना ने बताया कि सवाई माधोपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के दौरान 451 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक निर्माणकर्ताओं को उपकर जमा कराने के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्य नियोजक एवं ठेकेदारों को पहले निर्माण से संबंधित दस्तावेज और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। निर्धारित प्रक्रिया के बाद यदि उपकर जमा नहीं कराया जाता है तो श्रम विभाग स्वयं निर्माण लागत का निर्धारण कर एकपक्षीय आदेश जारी करेगा।

सहायक श्रम आयुक्त राकेश कुमार मीना ने बताया कि तय अवधि में उपकर जमा नहीं कराने पर 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 100 प्रतिशत तक पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। इसके बाद भी यदि राशि जमा नहीं की जाती है तो ब्याज एवं पेनल्टी सहित वसूली की कार्रवाई जिला प्रशासन के माध्यम से की जाएगी।

उन्होंने बताया कि वसूली प्रक्रिया के तहत कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। श्रम विभाग ने सभी भवन स्वामियों, मुख्य नियोजकों और ठेकेदारों से समय पर निर्माण उपकर जमा कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि नियमानुसार कार्रवाई से बचा जा सके।

Pratahkal Bureau

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