मंडी रोड पर सर्वे टीम की जांच और अनियमितताएं

  • 'पेड़ बचाओ आंदोलन' के तहत गठित सर्वेक्षण दल ने आज आलनपुर सर्कल से मंडी रोड पर किए गए विकास कार्यों के दौरान पेड़ों की कटाई का निरीक्षण किया।
  • सर्वे टीम के अनुसार, विकास कार्य के नाम पर बिना उचित प्रक्रियाओं की पालन के लिए हुए तहसीलदार द्वारा जितने पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में पेड़ काट दिए गए।
  • केंद्रीय मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित सीमा से बाहर जाकर भी पेड़ों को काटा गया।
  • टीम ने काटे गए पेड़ों की लोकेशन, फोटोग्राफ और दूरी का ब्योरा एकत्र किया है, जिसे 20 फरवरी को होने वाली सुनवाई में जिला जज के समक्ष पेश किया जाएगा।

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का विरोध

स्थानीय निवासियों ने सर्वे टीम को बताया कि उन्होंने पेड़ काटे जाने का विरोध किया था। "उनका कहना था कि जिन पेड़ों को काटा जाना था, उन पर कोई नंबर या निशान नहीं लगाया गया था। विरोध करने पर उन्हें डांट-फटकार कर वहां से भगा दिया गया और पुलिस में बंद कराने की धमकी दी।" लोगों ने बताया कि काटी गई लकड़ियों को कहां ले जाया गया, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।

इस पूरे मामले को लेकर मंडी रोड के व्यापारियों में भी भारी आक्रोश है। सर्वे टीम ने यह भी पाया कि मंडी रोड पर अभी भी 60 से अधिक पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें बचाकर विकास कार्यों को अंजाम दिया जा सकता है। सर्वे के दौरान कुछ महिला और लोगों ने बताया कि बरगद और पीपल जैसे पेड़ को भी काट कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है। "उपस्थित कई महिलाओं ने बताया कि वार त्यौहार पर हम इनको पूजते हैं अब क्या करेंगे।"


बजरिया डिस्पेंसरी में बिना अनुमति अवैध कटाई

वहीं, एक अन्य मामले में बजरिया स्थित डिस्पेंसरी परिसर में पेड़ों की अवैध कटाई का मामला उजागर हुआ है। स्थानीय निवासी रोहित शर्मा की शिकायत पर तहसीलदार ने जांच की, जिसमें पुष्टि हुई कि परिसर में बिना किसी अनुमति के 12 पेड़ काट दिए गए। रोहित शर्मा ने इस मामले को मानटाउन थाने में नियमानुसार कार्यवाही करने लिए 18 फरवरी को थाने में जाकर दिया था। परंतु अभी मामला दर्ज नहीं किया गया है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि काटे गए पेड़ों में 'पंचवटी' (आम, अशोक, नीम, बरगद, पीपल) में शामिल पवित्र वृक्ष भी हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में नहीं काटा जाना चाहिए था।

इस मामले की भी शिकायत जिला कलेक्टर को भी की गई है।


सुप्रीम कोर्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप

  • वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय रणथंभोर बाघ परियोजना क्षेत्र के आसपास होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई या लकड़ी परिवहन के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य है।
  • सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि शहरी क्षेत्रों में 50 से अधिक पेड़ों की कटाई के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित सशक्त समिति (एससीए) से अनुमति लेना जरूरी है।
  • आरोप है कि तहसीलदार ने अलग-अलग हिस्सों में बांटकर सैकड़ों पेड़ काटने की अनुमति दी, जो कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और ऐसा लकड़ी तस्करों के साथ मिलीभगत से किया गया।

अदालत से न्याय की उम्मीद

जब इस संबंध में अनुमति के दस्तावेज मांगे गए तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अब इस पूरे प्रकरण पर 20 फरवरी को लोक अदालत में सुनवाई होगी, जहां जिला जज इस मामले की सुनवाई करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में कई अहम खुलासे हो सकते हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा सकती है। क्षेत्र में अवैध पेड़ कटाई के इन मामलों से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में रोष है।

Pratahkal Bureau

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