सवाई माधोपुर: पेड़ों की अवैध कटाई मामले में अदालत में सुनवाई, 311 पेड़ों के साक्ष्य पेश
याचिकाकर्ताओं ने 311 पेड़ों की कटाई और 336 पेड़ों पर खतरे के जियो-ट्रैकिंग साक्ष्य पेश किए, तहसीलदार की भूमिका पर भी उठाए सवाल।

सवाई माधोपुर की स्थायी लोक अदालत में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य और दस्तावेज़।
सवाई माधोपुर। शहर में बड़ी संख्या में पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में गुरुवार को स्थायी लोक अदालत में अध्यक्ष एवं जिला जज के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष दावा किया गया कि सवाई माधोपुर में अब तक 311 पेड़ों की कटाई की जा चुकी है, जिसके साक्ष्य एवं सबूत अदालत में प्रस्तुत किए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि अभी भी लगभग 336 पेड़ कटाई के खतरे में हैं।
अदालत में दलीलें और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष पेड़ों की लकड़ी के कथित अवैध व्यापार तथा तहसीलदार द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दी गई स्वीकृति सहित विभिन्न पहलुओं को भी रखा। अधिवक्ता जगन्नाथ चौधरी, मुकेश कुमार भूप्रेमी, राजेश मीणा, प्रेमराज मीणा, राजेश मीणा एवं भरत लाल बेरवा ने पक्ष रखते हुए बताया कि "माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को मनुष्यों की हत्या से भी बदतर बताया है।"
विपक्षी दलों का जवाब और शपथपत्र के निर्देश
वहीं, अपर पक्ष की ओर से जवाब पेश करते हुए कहा गया कि उनके द्वारा केवल बजरिया क्षेत्र में 17 पेड़ तथा मंडी रोड पर 35 पेड़ों की ही कटाई की गई है। इस पर अदालत ने अप्रार्थी पक्ष को अपने तथ्यों को शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से सहायक अभियंता (AEN), नायब तहसीलदार तथा अन्य अधिकारियों ने भी अपना पक्ष रखा।
जियो-ट्रैकिंग साक्ष्य और वर्तमान स्थिति
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या वर्तमान में पेड़ों की कटाई रोक दी गई है, जिस पर सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से बताया गया कि अब किसी प्रकार की कटाई नहीं की जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 311 काटे गए पेड़ों और 336 बचे हुए पेड़ों की फोटोग्राफी जियो-ट्रैकिंग के माध्यम से की गई है तथा उनकी सूची भी तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई है। अदालत ने इन तथ्यों का बारीकी से अवलोकन करते हुए पूरे मामले को गंभीरता से सुना।
जनहित और पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद
मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला जनहित, पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए उन्हें न्यायालय से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की दिशा में ठोस कार्रवाई की आशा है।

Pratahkal Bureau
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