सवाई माधोपुर: अनाज मंडी रोड पर बिना अनुमति काटे गए सैकड़ों पेड़, अदालत में सुनवाई टली
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष के अवकाश पर होने से टली सुनवाई, वन विभाग की एनओसी के बिना 250 से अधिक पेड़ों की कटाई का मामला।

सवाई माधोपुर के अनाज मंडी रोड पर हमीर सर्कल से आलमपुर सर्कल के बीच काटे गए पेड़ों के विरोध में लामबंद पर्यावरण प्रेमी और आंदोलनकारी।
न्यायालयीन प्रक्रिया और अगली तिथि
मामले में सभी अप्रार्थियों को नोटिस जारी होकर तामील हो चुकी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं की टीम में शामिल थे:
- जगन्नाथ चौधरी
- राजेश मीणा
- मुकेश भूप्रेमी
- प्रेमराज मीणा
- भारत लाल मीणा
अधिवक्ताओं ने बताया कि अगली स्थाई लोक अदालत 25 फरवरी को आयोजित होगी, जिसमें अवैध वृक्ष कटाई को अतिआवश्यक मामला मानते हुए तुरंत सुनवाई और तत्काल अंतरिम रोक की मांग की जाएगी।
न्यायालय की अवमानना और वर्तमान स्थिति
अधिवक्ताओं ने बताया कि याचिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद सवाई माधोपुर शहर के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर अनाज मंडी रोड पर हमीर सर्कल से लेकर आलमपुर सर्कल तक लगातार वृक्ष कटाई की जा रही है। यह न्यायालयीन प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप एवं गंभीर अवमानना की श्रेणी में आता है।
अनाज मंडी रोड: बिना अनुमति 150 से अधिक पेड़ कटे
आंदोलन टीम का सर्वे लगातार जारी है और मामले के सबसे गंभीर और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि:
- PWD विभाग द्वारा दिसंबर माह 2025 में तहसीलदार कार्यालय में वृक्ष कटाई की अनुमति हेतु आवेदन किया गया था।
- तहसीलदार कार्यालय से कोई भी अनुमति जारी नहीं की गई, इसके बावजूद अनाज मंडी रोड पर लगभग 150 से अधिक पेड़ काट दिए गए।
- आज भी करीब 100 पेड़ (छोटे व बड़े मिलाकर) जीवित खड़े हैं, जिन पर कटाई का आसन्न खतरा बना हुआ है।
याचिकाकर्ताओं ने इसे "खुला कानून उल्लंघन और संगठित पर्यावरण अपराध" बताया है।
जनविरोध और मार्मिक अपील की अनदेखी
स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं पेड़ बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों द्वारा लगातार विरोध किया गया, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों को नहीं छोड़ा गया। कटाई व्यस्त सड़क पर बिना बैरिकेडिंग, बिना सुरक्षा इंतजाम और बिना सार्वजनिक सूचना के की गई, जिससे आमजन की जान को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। मंडी रोड पर कई लोगों ने सख्त विरोध किया तब भी पेड़ को काट दिया गया। यहाँ तक कि लोगों ने हाथ भी जोड़े, उसके बावजूद पेड़ों को अंधाधुंध तरीके से काट दिया गया।
आंदोलन कार्यकर्ताओं को बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष सोहन सिंह नरूका ने बताया कि: "मेरी पार्टी की सरकार होने के बावजूद भी मैं अपने पिताजी द्वारा लगाए गए पेड़ों को नहीं बचा पाया, एक पेड़ बड़ी मुश्किल से बचाया था।"
वन विभाग की अनिवार्य NOC का अभाव
आज आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने सामाजिक वानिकी के उपवन संरक्षक (DCF) से भी संपर्क किया। उपवन संरक्षक ने स्पष्ट रूप से कहा कि: “इस पूरे प्रकरण में हमारे विभाग से कोई भी NOC नहीं ली गई है, जबकि नियमानुसार यह अनिवार्य है।”
यह तथ्य इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कटाई स्थल रणथंभोर राष्ट्रीय उद्यान एवं उसके बफर जोन के अत्यंत समीप स्थित है।
प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप
बजरिया स्थित डिस्पेंसरी परिसर में भी लगभग 20 पेड़ काटे गए थे, जिसमें तहसीलदार की जांच में 12 पेड़ों की पुष्टि होने के बाद भी अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं किया जाना प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की पड़ताल में निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं:
- बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ही कथित रूप से केवल 84 वृक्षों की अनुमति दर्शाई जा रही है।
- सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 4 फरवरी 2026 को आवेदन किया और तहसीलदार द्वारा दूसरे ही दिन 5 फरवरी 2026 को स्वीकृति दे दी गई।
- अब तक लगभग 250 से अधिक वृक्ष काटे जा चुके हैं और काटी गई लकड़ी का बिना लाइसेंस व बिना टेंडर अवैध व्यापार किया गया।
- कई स्थानों पर कटाई अनुमति क्षेत्र से बाहर, अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद और बिना मार्किंग/नंबरिंग के की गई।
- पीपल, बरगद, नीम, अशोक जैसे पंचमेल वृक्षों की कटाई की गई।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासनिक उदासीनता और मौन सहमति को दर्शाता है।

Harak Chand Jain, Sawai Maadhopur
नाम: हरक चंद जैन
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: सवाई माधोपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जनहित के मुद्दे और स्थानीय समाचार (सवाई माधोपुर)
परिचय
हरक चंद जैन राजस्थान के सवाई माधोपुर क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से सवाई माधोपुर जिले के स्थानीय समाचारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
हरक चंद जैन को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। अपने इस दीर्घकालिक करियर के दौरान वह कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं:
- दैनिक प्रातःकाल: पिछले 6 वर्षों से लगातार 'दैनिक प्रातःकाल' के साथ जुड़कर कार्यरत हैं।
- अन्य समाचार पत्र: इसके पूर्व उन्होंने धर्म दिवाकर, देश की धरती, जननायक, नवज्योति, नवभारत टाइम्स और महका भारत जैसे विभिन्न समाचार पत्रों के लिए पत्रकारिता की है।
