सवाई माधोपुर में हाई रिस्क गर्भवतियों की होगी विशेष निगरानी, लेबर रूम-ओटी प्रोटोकॉल का रोजाना पालन अनिवार्य
सवाई माधोपुर में हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए नई गाइडलाइन लागू हुई है। एएनएम-आशा निगरानी, हायर सेंटर मैपिंग और लेबर रूम-ओटी प्रोटोकॉल पर सख्ती बढ़ाई गई है।

सवाई माधोपुर जिले में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली प्रत्येक गर्भवती अब एएनएम और आशा की नियमित निगरानी में रहेगी। पंजीकरण के बाद गर्भवती के स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी तथा जांच और प्रसव की जिम्मेदारी भी पहले से तय होगी। चिकित्सा विभाग ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत जोखिम के आधार पर प्रत्येक गर्भवती को हायर सेंटर के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), उपजिला अस्पताल, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज से मैप किया जाएगा। इसके साथ ही 104 और 108 एंबुलेंस की भी मैपिंग की जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान उन हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान की गई है, जिनकी इसी महीने डिलीवरी होनी है। नई व्यवस्था के अनुसार हाई रिस्क गर्भवती महिला की पांच नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। आवश्यकता होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता दी जाएगी। वहीं लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के लिए जारी प्रोटोकॉल का प्रतिदिन पालन सुनिश्चित किया जाएगा। हाई रिस्क गर्भवती से जुड़ी एएनएम प्रत्येक सप्ताह तीन बार व्यक्तिगत संपर्क करेगी। इस संबंध में जिला स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले की सभी एएनएम को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर तथा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में जोखिम कम करने के उद्देश्य से चिकित्सा विभाग ने नया प्रोटोकॉल लागू किया है। इसके तहत प्रत्येक गर्भवती के पहले पंजीकरण के समय ही प्रसव का जोखिम तय किया जाएगा। एएनसी के दौरान सभी आवश्यक जांच और चिकित्सकीय परामर्श लिया जाएगा। संबंधित एएनएम और आशा को प्रत्येक गर्भवती का अनिवार्य रूप से पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले पंजीकरण के समय सभी आवश्यक जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान की जाएगी। जोखिम के कारणों का पता लगाकर उनका उपचार कराया जाएगा तथा संबंधित चिकित्सक ही जोखिम का निर्धारण करेंगे।
डॉ. जेमिनी ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पुष्टि होने पर संबंधित क्षेत्र की एएनएम और आशा गर्भवती के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करेंगी। सप्ताह में दो बार गर्भवती से सीधा संपर्क कर उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली जाएगी। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया जाएगा। साथ ही सुरक्षित प्रसव के लिए पहले से ही हायर सेंटर निर्धारित कर दिया जाएगा। इसके लिए सीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज की सुविधा वाले अस्पताल का चयन किया जाएगा। चिकित्सा विभाग की टीम घर-घर जाकर भी गर्भवतियों से जानकारी जुटा रही है।
नई व्यवस्था के तहत जिले में मातृ मृत्यु की समीक्षा के लिए अस्पताल स्तर पर गठित समिति प्रत्येक सप्ताह मामलों के कारणों की समीक्षा करेगी। अस्पताल की मातृ मृत्यु ऑडिट कमेटी में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। गर्भवती महिला के प्रसव पूर्व स्वास्थ्य, दो बच्चों के बीच अंतर, एनीमिया तथा पूर्व प्रसव के दौरान हुई जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी तैयार की जाएगी।
चिकित्सा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में प्रतिदिन ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, लेबर रूम तथा मरीजों की संख्या से संबंधित रिपोर्ट तैयार की जाए। मरीज की मृत्यु चिकित्सकीय लापरवाही से नहीं हो, इसके लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। गर्भवती के पोषण और सुरक्षित प्रसव को लेकर स्त्री रोग विशेषज्ञ परामर्श देंगी। इसके अलावा उपचार संबंधी सुविधाओं, प्रोटोकॉल के पालन, ब्लड बैंक, आईसीयू, लेबर रूम, ओटी, प्रतिदिन होने वाले सामान्य एवं सिजेरियन प्रसव, उच्च जोखिम वाली गर्भवती के लक्षण, भर्ती गर्भवतियों की स्थिति, लेबर रूम, ओटी तथा बेड की उपलब्धता सहित सभी बिंदुओं पर नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह व्यवस्था मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की सतत निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau
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