राज्य सरकार द्वारा संचालित 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' आमजन के लिए समस्याओं के त्वरित निस्तारण का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। इसी कड़ी में सवाई माधोपुर जिले की ग्राम पंचायत करमोदा में आयोजित शिविर उस समय ऐतिहासिक बन गया, जब वर्षों से राजस्व अभिलेखों में चली आ रही एक गंभीर त्रुटि का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। इस पहल ने छह सहखातेदारों को न केवल कानूनी उलझनों से मुक्ति दिलाई, बल्कि उन्हें सुशासन का वास्तविक अनुभव भी कराया।

करमोदा निवासी सहखातेदारों के लिए राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज पिता का गलत नाम पिछले कई वर्षों से एक बड़ी बाधा बना हुआ था। यह तकनीकी त्रुटि उनके दैनिक राजस्व कार्यों और कानूनी औपचारिकताओं में भारी परेशानी का सबब बनी थी। ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान जब यह मामला राजस्व विभाग के अधिकारियों के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने बिना किसी देरी के त्वरित संज्ञान लिया। राजस्व अधिकारियों ने प्रकरण का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 136 के अंतर्गत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण की और पिता के नाम में सुधार हेतु प्रस्ताव तैयार किया।

इस त्वरित कार्रवाई का सीधा लाभ खाता संख्या 102 के सात सहखातेदारों—केदार, दीलाराम, पुनी, प्रहलाद, बद्रीचंद, राजकल्याण और बंशीलाल (सभी पुत्र/पुत्री गंगल्या)—को प्राप्त हुआ। वर्षों से लंबित इस समस्या के समाधान ने प्रभावित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ दी है। लाभार्थियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि अब उन्हें सरकारी कार्यालयों के अंतहीन चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। उन्होंने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और राजस्व विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस अभियान को आमजन के लिए एक वरदान बताया। यह घटनाक्रम सिद्ध करता है कि जमीनी स्तर पर आयोजित ऐसे शिविर प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक प्रभावी कदम हैं, जो जनता और सरकार के बीच की दूरी को मिटाकर त्वरित न्याय सुनिश्चित कर रहे हैं।

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