सवाई माधोपुर: मासूमों को जीवनदान और बाल विवाह पर प्रहार, एडीएम ने किया पोस्टर का विमोचन
सवाई माधोपुर में अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध और 'आश्रय पालना गृह' पोस्टरों का विमोचन किया। "फेंकें नहीं, हमें दें" थीम के साथ अनचाहे नवजातों को सुरक्षित जीवन देने और बाल विवाह जैसी कुरीति को रोकने के लिए जिला प्रशासन का यह बड़ा कदम है। जानें बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून और पालना गृह की सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी।

सवाई माधोपुर, 8 जनवरी। सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद करते हुए सवाई माधोपुर जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील और कड़ा संदेश जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है। जिले के अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा ने कलेक्ट्रेट परिसर में बाल विवाह प्रतिषेध जागरूकता और 'आश्रय पालना गृह' के विशेष पोस्टरों का विमोचन किया। यह पहल न केवल बचपन को बेड़ियों से मुक्त करने का संकल्प है, बल्कि उन मासूम जिंदगियों को सुरक्षा कवच प्रदान करने की भी एक पुकार है, जिन्हें अनचाहे होने के कारण असुरक्षित छोड़ दिया जाता है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर द्वारा जारी किए गए इन पोस्टरों में "फेंकें नहीं, हमें दें, जीवन बचाएं" की मार्मिक अपील प्रमुखता से उकेरी गई है। यह पोस्टर आमजन को झकझोरते हुए संदेश देता है कि किसी भी अनचाहे नवजात शिशु को कूड़े के ढेरों, कटीली झाड़ियों या नालियों में फेंककर मौत के मुँह में न धकेलें। इसके बजाय, जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए सुरक्षित 'पालना गृह' में शिशु का परित्याग करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित पालना गृह में बच्चे को छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है और उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कानूनी कार्यवाही नहीं की जाती है। वर्तमान में सवाई माधोपुर शहर के राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह (आटूण रोड), राजकीय सामान्य चिकित्सालय और गंगापुर सिटी स्थित राजकीय सामान्य चिकित्सालय में ये पालना गृह जीवन रक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए भी पोस्टर के माध्यम से कानूनी प्रावधानों को सार्वजनिक किया गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि विवाह के लिए पुरुष की आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष होना अनिवार्य है। पोस्टर में कानूनी बारीकियों जैसे बाल विवाह को शून्य घोषित करने, न्यायालय द्वारा निषेधाज्ञा जारी करने और इस अपराध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती श्रेणी में रखने की महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई हैं। यह कदम ग्रामीणों और शहरी क्षेत्रों में कानून के प्रति भय और जागरूकता दोनों पैदा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक विमलेश कुमार ने इस अवसर पर बताया कि 'बाल विवाह मुक्त भारत' के संकल्प को सिद्ध करने के लिए जिला कलक्टर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में 100 दिवसीय विशेष अभियान गति पकड़ रहा है। अभियान के पहले चरण में विद्यालयों को केंद्रित करने के बाद, अब द्वितीय चरण में 31 जनवरी, 2026 तक धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सघन जागरूकता फैलाई जाएगी। इस दौरान टेंट व्यवसायियों, कैटरर्स और कार्ड प्रिंटर्स जैसे सेवा प्रदाताओं को विशेष रूप से पाबंद किया जाएगा कि वे किसी भी बाल विवाह का हिस्सा न बनें, क्योंकि इसमें सहयोग करना भी एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
इस गरिमामयी विमोचन कार्यक्रम के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्वेता गर्ग, सदस्य ज्योति शर्मा, सहायक निदेशक विमलेश कुमार शर्मा और चाइल्ड हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर मुकेश वर्मा उपस्थित रहे। प्रशासन की यह दोहरी रणनीति—एक ओर नवजातों को जीवनदान देने की और दूसरी ओर बचपन को विवाह की अग्नि से बचाने की—जिले के सामाजिक परिदृश्य में एक सकारात्मक और निर्णायक बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Bureau
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