सवाई माधोपुर उत्सव: कैलाश खेर की सूफी धुनों और त्रिनेत्र गणेश की भक्ति से सजेगा रणथम्भौर की धरा पर खुशियों का मेला
सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस पर 17 से 19 जनवरी तक आयोजित होगा भव्य बाघ महोत्सव। त्रिनेत्र गणेश की महाआरती से शुरू होने वाले इस उत्सव में सूफी गायक कैलाश खेर की म्यूजिकल नाइट, लोक नृत्य, कला शिविर और पारंपरिक खेलों का संगम दिखेगा। जानिए इस ऐतिहासिक आयोजन का पूरा कार्यक्रम और मुख्य आकर्षण।

सवाई माधोपुर। राजस्थान की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और अदम्य लोक परम्पराओं का केंद्र सवाई माधोपुर अपने 263वें स्थापना दिवस को एक ऐतिहासिक ‘बाघ महोत्सव’ के रूप में मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आगामी 17 से 19 जनवरी तक चलने वाला यह त्रि-दिवसीय आयोजन न केवल जिले की वीरगाथाओं को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि रणथम्भौर की वादियों में सुरों और कला का ऐसा संगम पैदा करेगा जिसे देख दुनिया ठिठक जाएगी। उत्सव का आगाज़ जहां विश्व प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर में होने वाली भव्य महाआरती की गूँज से होगा, वहीं इसका समापन बॉलीवुड के विख्यात सूफी गायक कैलाश खेर की जादुई आवाज़ और आकाश को चकाचौंध करती आतिशबाजी के साथ होगा। यह महोत्सव सवाई माधोपुर के बाघों, घड़ियालों, अनूठी लोक कलाओं और यहाँ के मीठे अमरूदों की मिठास को वैश्विक पहचान दिलाने का एक महाभियान है।
महोत्सव के पहले दिन यानी 17 जनवरी को प्रातः 9 बजे रणथम्भौर दुर्ग की ऊंचाइयों पर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी के चरणों में महाआरती अर्पित कर उत्सव का विधिवत शंखनाद किया जाएगा। इसके तुरंत बाद दशहरा मैदान में फोटो प्रदर्शनी और 'रणथम्भौर कला शिविर' के माध्यम से रंगों का उत्सव शुरू होगा। इस तीन दिवसीय शिविर में हैदराबाद के मशहूर चित्रकार विजय एम. धोरे अपनी तूलिका का जादू बिखेरेंगे, जबकि स्थानीय चित्रकारों के साथ प्रदेश भर के कलाकार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। शिविर के क्यूरेटर विजय कुमावत के अनुसार, इसमें भाग लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी गई है। कला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को 21 हजार, 11 हजार और 5 हजार रुपये के पुरस्कारों से नवाजा जाएगा। इसी दिन शाम को खण्डार स्थित ऐतिहासिक रामेश्वरघाट पर हज़ारों दीपकों की रोशनी के बीच दीपदान का कार्यक्रम आयोजित होगा, जो चंबल की लहरों को भक्तिमय प्रकाश से सराबोर कर देगा।
परंपरागत खेलों के बिना राजस्थान का उत्सव अधूरा है। इसी उद्देश्य से खिलचीपुर के हैलीपैड मैदान में रस्साकशी, नींबू-चम्मच दौड़, मटका दौड़ और साफा बांधने जैसी रोचक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। उत्सव के दूसरे दिन 18 जनवरी की सुबह प्रकृति प्रेमियों के नाम रहेगी। चौथ का बरवाड़ा स्थित लवकुश वाटिका में रेंजर कैलाश शर्मा के निर्देशन में दो किलोमीटर लंबी 'नेचर वॉक' का आयोजन होगा। इसके पश्चात पुलिस लाइन मैदान में फुटबॉल मैच और दशहरा मैदान में प्रसिद्ध ‘अमरूद एक्सपो’ का आयोजन होगा, जो जिले की कृषि प्रधान पहचान को प्रदर्शित करेगा। शाम को सांस्कृतिक संध्या में राजस्थान के विभिन्न अंचलों के कलाकार चरी, कच्छी घोड़ी, घूमर, भपंग-वादन और बृज की लठमार होली जैसे नृत्यों से सवाई माधोपुर की फिजां में लोक संस्कृति का रंग भरेंगे।
महोत्सव के अंतिम दिन 19 जनवरी को नगर परिषद में सवाई माधोपुर के दूरदर्शी संस्थापक सवाई माधोसिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद पुराने शहर के भैरू दरवाजा से छोटा राजबाग तक निकलने वाली शाही शोभायात्रा शहर की सड़कों पर राजसी वैभव का दर्शन कराएगी। शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को अपनी विरासत से जोड़ने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार मीना के नेतृत्व में 'सवाई माधोपुर को जानो' प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया जाएगा। इस पूरे महाकुंभ का चरमोत्कर्ष 'रणथम्भौर रागा म्यूजिकल नाइट' होगी, जहाँ कैलाश खेर अपनी सूफी बंदिशों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। जिला कलेक्टर काना राम ने इस अवसर पर समस्त जिलेवासियों से आह्वान किया है कि वे इस उत्सव में सहभागी बनकर सवाई माधोपुर की पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

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