सवाई माधोपुर में झूठे आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है, जिसमें माननीय न्यायालय ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में परिवादी को दोषी मानते हुए अर्थदण्ड से दण्डित किया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय जयपुर, राजस्थान द्वारा झूठे मुकदमों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत की गई।

घटना की शुरुआत 01 फरवरी 2025 को थाना कोतवाली सवाई माधोपुर में दर्ज प्रकरण संख्या 31/2025 से हुई, जिसमें परिवादी कन्हैयालाल माली पुत्र श्योराम, निवासी बीच का टापरा रामसिंहपुरा, ने अपने भाई मुकेश माली और भाभी संपत के साथ स्कूटी सवार द्वारा तेज गति एवं लापरवाही से टक्कर मारने और दुर्घटना में उनके घायल होने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 281 और 125(a) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसी प्रकरण के क्रॉस में प्रकरण संख्या 83/2025 भी दर्ज हुआ, जिसमें परिवादी राजेश मीना ने अपने पक्ष से संबंधित शिकायत प्रस्तुत की थी। मामले की जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयानों और अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि किसी भी वाहन द्वारा टक्कर नहीं मारी गई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना सड़क पर अचानक जानवर आ जाने के कारण असंतुलन बिगड़ने से हुई थी।

अनुसंधान के दौरान यह भी पाया गया कि कानूनी सलाह लेकर बीमा दावा प्राप्त करने के उद्देश्य से झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। बाद में परिवादी कन्हैयालाल माली ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत होकर अपने पूर्व आरोपों को वापस लेते हुए वास्तविक स्थिति स्पष्ट की।

मामले में अनुसंधान पूर्ण होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 217 और 248 के तहत न्यायालय में इस्तगासा प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के उपरांत माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सवाई माधोपुर ने परिवादी कन्हैयालाल माली को झूठा मुकदमा दर्ज कराने का दोषी मानते हुए 10 हजार रुपये के जमानत मुचलके पर पाबंद करते हुए 1500 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि झूठी शिकायतें दर्ज कराना एक गंभीर अपराध है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न होती है और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में भविष्य में भी कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रखने की बात दोहराई गई है, ताकि झूठे प्रकरणों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

Pratahkal Bureau

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