सवाई माधोपुर: जिला परिषद और पंचायत समितियों के वार्डों के पुनर्गठन का प्रारूप जारी, 5 जनवरी तक मांगी आपत्तियां
सवाई माधोपुर जिला कलक्टर काना राम द्वारा जिला परिषद और पंचायत समितियों के वार्डों के पुनर्गठन का प्रारूप प्रकाशित कर दिया गया है। अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा ने बताया कि जिले के 31 जिला परिषद वार्डों और विभिन्न पंचायत समितियों के लिए 5 जनवरी तक आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें यह विस्तृत रिपोर्ट।

सवाई माधोपुर, 1 जनवरी। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में पंचायती राज व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और चुनावी तैयारियों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला कलक्टर काना राम ने जिला परिषद एवं पंचायत समितियों के एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों यानी वार्डों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन का प्रारूप आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दिया है। इस प्रकाशन के साथ ही जिले की ग्रामीण राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह पुनर्गठन भविष्य की चुनावी सीमाओं को निर्धारित करेगा।
अतिरिक्त जिला कलक्टर संजय शर्मा ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिला परिषद सवाई माधोपुर के लिए कुल 31 निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के स्वरूप में भी स्पष्टता लाई गई है। नए प्रारूप के अनुसार, बामनवास पंचायत समिति में 23 वार्ड, बौंली में 19, मलारनाडूंगर में 17, सवाई माधोपुर में 23, चौथ का बरवाड़ा में 21, खण्डार में 23, गंगापुर सिटी में 19 और वजीरपुर में 15 निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है। यह सीमांकन जनसंख्या और प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
प्रशासन ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। पुनर्गठन का यह प्रारूप संबंधित उपखण्ड अधिकारी कार्यालय, पंचायत समिति कार्यालय और तहसील कार्यालयों में आम जनता के अवलोकन के लिए उपलब्ध करवा दिया गया है। लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखते हुए प्रशासन ने जनता को अपनी राय रखने का अवसर भी दिया है। यदि किसी भी वयस्क मतदाता को इस पुनर्सीमांकन पर कोई आपत्ति है, तो वह 5 जनवरी, 2026 तक अपनी लिखित आपत्ति संबंधित उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार या सीधे जिला कलक्टर कार्यालय में दर्ज करा सकता है।
निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त होने वाली समस्त आपत्तियों का सूक्ष्मता से निस्तारण किया जाएगा, जिसके पश्चात ही वार्डों के सीमांकन का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। यह कवायद न केवल चुनावी प्रक्रिया का आधार बनेगी, बल्कि ग्रामीण विकास के विकेंद्रीकरण और स्थानीय प्रतिनिधित्व को भी नई दिशा प्रदान करेगी। प्रशासन की इस सक्रियता से जिले में पारदर्शी लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास और सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

Pratahkal Bureau
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