राजस्थान में मानसून की दस्तक से पूर्व जल संरचनाओं की सुरक्षा और उनकी क्षमता को सुनिश्चित करने हेतु 'डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल' ने जिले की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का दो दिवसीय सघन दौरा प्रारंभ किया है। पैनल के अध्यक्ष एवं विशेषज्ञों के दल ने गुरुवार को जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मानसरोवर, देवपुरा एवं सूरवाल बांधों का विस्तृत धरातलीय निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने न केवल बांधों की संरचनात्मक स्थिति का जायजा लिया, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपातकालीन तैयारियों की भी सूक्ष्म समीक्षा की।

दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान विशेषज्ञ दल ने बांधों की मुख्य संरचना, स्पिलवे की कार्यप्रणाली, गेट संचालन प्रणाली और जल निकासी की सुचारू व्यवस्था जैसे तकनीकी पहलुओं का कड़ा परीक्षण किया। मानसून के दौरान जल भराव और संभावित जल दबाव की स्थितियों से निपटने हेतु आपदा प्रबंधन की तैयारियों और मरम्मत कार्यों को भी बारीकी से परखा गया। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से वर्तमान जल भराव क्षमता और सुरक्षा मानकों पर विस्तृत चर्चा करते हुए पैनल ने मानसून पूर्व की गई समस्त व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

अधिशासी अभियंता अरुण शर्मा ने बताया कि इस दो दिवसीय अभियान के तहत जिले की पांच प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाओं—मानसरोवर, सूरवाल, ढील, देवपुरा और मोरसागर बांध—का विस्तृत निरीक्षण सुनिश्चित किया गया है। निरीक्षण के दौरान पैनल ने बांधों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने, नियमित मॉनिटरिंग और आवश्यक तकनीकी सुधारों के संबंध में विभागीय अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश एवं सुझाव प्रदान किए। फील्ड अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए तकनीकी सुझावों और मांगों को पैनल अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में प्राथमिकता से सम्मिलित करेगा।

सुरक्षित एवं प्रभावी जल प्रबंधन की महत्ता को रेखांकित करते हुए पैनल सदस्यों ने स्पष्ट किया कि बांधों की नियमित तकनीकी समीक्षा और सुरक्षा मानकों की सतत निगरानी जल संरक्षण की दृष्टि से अपरिहार्य है। मानसून पूर्व किए जाने वाले ये निरीक्षण किसी भी संभावित जोखिम की समय रहते पहचान करने और सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। इस उच्च स्तरीय निरीक्षण दल में पैनल के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता अजय कुमार त्यागी के साथ सदस्य जगदीश प्रसाद, मदन कुमावत एवं सुरेश भोपारिया (सभी सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता) सम्मिलित रहे। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता अरुण शर्मा सहित विभाग के संबंधित तकनीकी अधिकारी और कार्मिक भी उपस्थित रहे, जो जिले की जल संपदा को सुरक्षित रखने हेतु कटिबद्ध नजर आए।

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