सवाई माधोपुर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ठगी के 83 हजार रुपये रिफण्ड कराए
पुलिस ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप ट्रेडिंग ठगी के शिकार पीड़ित के खाते में 83,586 रुपये वापस जमा करवाए और म्यूल अकाउंट के प्रति चेतावनी जारी की।

सवाई माधोपुर साइबर सेल के एएसआई धर्मेंद्र चौधरी और कांस्टेबल महेश, जिन्होंने ऑनलाइन ट्रेडिंग धोखाधड़ी के मामले में ठगी गई राशि को रिफण्ड कराने में मुख्य भूमिका निभाई।
सवाई माधोपुर में फर्जी टेलिग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ट्रेडिंग के नाम पर हुई साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। साइबर थाना टीम ने ठगी गई कुल 1,03,080 रुपये की राशि में से 83,586.82 रुपये वापस परिवादी के खाते में रिफण्ड करवाकर पीड़ित को राहत दिलाई है।
यह कार्रवाई सुश्री ज्येष्ठा मैत्रेयी आईपीएस, जिला पुलिस अधीक्षक सवाई माधोपुर के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय सिंह और उप पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश अटल आरपीएस के सुपरविजन में की गई। साइबर क्राइम थाना टीम ने दिसंबर माह में हुई इस ऑनलाइन ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंकों के नोडल अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया और संदिग्ध खातों में ट्रांसफर की गई राशि को होल्ड करवाया।
घटना के अनुसार, 19 दिसंबर 2025 को परिवादी राकेश कुमार बैरवा, निवासी बहरावण्डा खुर्द, जिला सवाई माधोपुर ने साइबर पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि अज्ञात ठगों ने ट्रेडिंग के नाम पर उनसे कुल 1,03,080 रुपये ठग लिए। इस पर साइबर थाना सवाई माधोपुर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन ट्रैक किए और न्यायालय के आदेश की पालना में अब तक 83,586.82 रुपये की राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते में वापस रिफण्ड करवाई।
इस कार्रवाई में साइबर पुलिस थाना सवाई माधोपुर के सहायक उप निरीक्षक धर्मेन्द्र चौधरी और कांस्टेबल महेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों पर अनजान नंबरों से प्राप्त लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड न करें। किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर ठगी के संदर्भ में पुलिस ने ‘म्यूल अकाउंट’ के खतरे को भी स्पष्ट किया है। ऐसे खाते, जिनका उपयोग ठग अवैध लेन-देन छुपाने और ट्रांसफर के लिए करते हैं, धारक को गंभीर अपराध की श्रेणी में ला देते हैं। मामूली कमीशन या पार्ट टाइम जॉब के लालच में लोग अपने बैंक खाते ठगों को दे देते हैं, जिससे उन्हें कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलता, लेकिन वे भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 61(2)(क) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत अपराधी बन जाते हैं।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, पिन, ओटीपी, पासबुक या नेट बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड साझा न करें। बिना व्यापार के खाते में असामान्य लेन-देन होने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें। आसान लोन, पार्ट टाइम जॉब और कमीशन के झांसे से बचें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपना बैंक खाता किसी अन्य को उपयोग के लिए देना या बेचना दंडनीय अपराध है और संदिग्ध खातों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति के पास आसपास बिना व्यापार के अचानक बड़ी रकम का लेन-देन दिखाई दे, तो इसकी गुप्त सूचना पुलिस को दें, सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
यह मामला स्पष्ट करता है कि साइबर अपराध केवल तकनीकी नहीं, बल्कि जागरूकता का भी विषय है। छोटी सी लापरवाही व्यक्ति को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी अपराधी भी बना सकती है। सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।

Pratahkal Bureau
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