सवाई माधोपुर: रवांजना डूंगर में साइबर ठगों को बैंक खाता देने वाला गिरफ्तार
आरोपी जितेंद्र मीणा को पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध करवाने और धोखाधड़ी के आरोप में पकड़ा, कब्जे से मोबाइल और सिम कार्ड बरामद किए गए।

सवाई माधोपुर जिले के थाना रवांजना डूंगर पुलिस ने साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जो साइबर ठगों को अपना बैंक खाता (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध करवाता था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल और दो सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशालय राजस्थान व भरतपुर रेंज के आई.जी.पी. श्री कैलाश विश्नोई के आदेशानुसार, जिला पुलिस अधीक्षक सुश्री ज्येष्ठा मैत्रयी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विजय सिंह एवं पुलिस उप अधीक्षक वृत ग्रामीण श्री हंसराज बैरवा के सुपरविजन में थानाधिकारी दिलीप कुमार के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा अंजाम दी गई।
गिरफ्तार आरोपी और पुलिस टीम का विवरण
साइबर अपराधों में लिप्त पाए जाने पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी जितेन्द्र उर्फ जितू पुत्र मीठालाल जाति मीना, उम्र 22 साल, निवासी कुस्तला, थाना रवांजना डूंगर को गिरफ्तार किया है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में थानाधिकारी दिलीप कुमार पु.नि., कानिस्टेबल बसराम (1167), कानिस्टेबल शीशराम (1388) एवं कानिस्टेबल पप्पी सिंह (139) शामिल रहे।
धोखाधड़ी का तरीका और पुलिस जांच
साइबर अपराधों में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट्स की जांच के दौरान एक संदिग्ध खाते की जानकारी मिली थी, जिसमें साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से लाखों रुपये जमा किए गए थे। इस बैंक खाते के विरुद्ध साइबर पोर्टल 1930 पर जॉब फ्रॉड, टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट स्कीम और अन्य डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज थीं। जांच में सामने आया कि खाते का धारक जितेन्द्र उर्फ जितू है। जितेन्द्र व अन्य व्यक्तियों ने मिलकर आपराधिक षडयंत्र रचा और आमजन को साइबर फ्रॉड, डमी मैसेज, लॉस कवर व मनी हेल्प जैसे मैसेज भेजकर सर्विस चार्ज, जीएसटी चार्ज और विड्रॉल चार्ज के नाम पर ठगी की। इन लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग करते हुए अनजान लोगों से ठगी कर बैंक अकाउंट में राशि प्राप्त की, जिसके बाद पुलिस ने थाना रवांजना डूंगर पर प्रकरण संख्या 71/2026 के तहत बीएनएस की धारा 319(2), 318(4), 61(2)(ए) एवं 66(डी) आईटी एक्ट में मामला दर्ज किया है।
म्यूल अकाउंट की कड़वी सच्चाई और कानूनी चेतावनी
पुलिस द्वारा जन जागरूकता हेतु बताया गया कि "म्यूल अकाउंट का सरल अर्थ खच्चर खाता है; जैसे खच्चर दूसरों का बोझ ढोता है, वैसे ही कुछ लोग अपना बैंक खाता साइबर ठगों को पैसे छुपाने और ट्रांसफर करने के लिए दे देते हैं।" सच्चाई यह है कि म्यूल अकाउंट धारक को कोई बड़ा लाभ नहीं होता, उसे केवल थोड़े से कमीशन या पार्ट टाइम जॉब का लालच दिया जाता है और वह बिना किसी बड़े आर्थिक लाभ के जेल पहुंच जाता है। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अपना खाता किसी अन्य को उपयोग हेतु देना या बेचना दंडनीय अपराध है और पुलिस सभी संदिग्ध खातों की नियमित मॉनिटरिंग कर रही है।
सुरक्षित रहने हेतु पुलिस की विशेष सलाह
आम नागरिकों को सुझाव दिया गया है कि "किसी अनजान को अपना बैंक खाता, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, पिन, ओटीपी, पासबुक या नेट बैंकिंग यूजर आईडी-पासवर्ड कभी न दें और बिना व्यापार के खाते में होने वाली हर असामान्य लेन-देन की सूचना बैंक व पुलिस को दें।" लोगों को 'आसान लोन', 'पार्ट टाइम जॉब' और 'कमीशन' के झांसे में न आने की सलाह दी गई है। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवाएं। पुलिस ने स्थानीय सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति बिना व्यापार के अचानक बड़ी रकम का लेन-देन कर रहा हो, तो उसकी गुप्त सूचना पुलिस को दें, सूचनादाता का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस का अंतिम संदेश है कि "साइबर अपराध केवल तकनीकी अपराध नहीं है, आपकी छोटी-सी लापरवाही आपको अपराधी बना सकती है; सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।"

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