सवाई माधोपुर: राजकीय दत्तक ग्रहण एजेंसी ने दंपति को सौंपा मासूम बालक
मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन मैचिंग के बाद तीन साल से इंतजार कर रहे दंपति को प्री-एडॉप्शन फोस्टर केयर के लिए बच्चा सुपुर्द किया गया।

सवाई माधोपुर की राजकीय दत्तक ग्रहण एजेंसी में विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दत्तक माता-पिता को बालक सौंपते अधिकारी और उपस्थित गणमान्य व्यक्ति।
राजकीय दत्तक ग्रहण एजेंसी में आवासित एक मासूम बालक के जीवन में ममता और स्नेह का नया सवेरा हुआ है। समस्त विधिक प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के पश्चात इस बालक को दत्तक ग्रहण पूर्व पोषण देखभाल हेतु एक नए परिवार को सौंप दिया गया। इस भावुक अवसर पर दत्तक माता-पिता ने जिला कलक्टर से शिष्टाचार भेंट की, जहां कलक्टर ने दंपत्ति को बधाई देते हुए बालक के उज्ज्वल एवं सुरक्षित भविष्य की मंगलकामना की। यह मिलन न केवल एक मासूम को परिवार का संरक्षण दिलाने वाला सिद्ध हुआ, बल्कि पिछले तीन वर्षों से अपने आंगन में किलकारियों की प्रतीक्षा कर रहे दंपत्ति के जीवन में भी हर्षोल्लास की नई सौगात लेकर आया। बालक को पहली बार आलिंगन में लेते ही माता-पिता के नेत्र सजल हो उठे और उन्होंने अटूट विश्वास जताया कि अब उनका परिवार पूर्ण हो गया है तथा वे बालक को भरपूर प्रेम व सुरक्षित परिवेश प्रदान करेंगे।
विधिक प्रक्रिया के सोपानों की जानकारी देते हुए बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक विमलेश कुमार ने बताया कि बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्वेता गर्ग एवं सदस्यगण द्वारा बालक को दत्तक ग्रहण हेतु विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित किया गया था। इसके उपरांत बालक का संपूर्ण विवरण भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के “मिशन वात्सल्य” पोर्टल पर साझा किया गया। पोर्टल के माध्यम से ही बालक की ऑनलाइन मैचिंग उस दंपत्ति से हुई जो लंबे समय से संतान प्राप्ति की राह देख रहे थे। तत्पश्चात दत्तक ग्रहण समिति की बैठक में भावी माता-पिता के दस्तावेजों, उनकी आर्थिक सुदृढ़ता और सामाजिक पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन किया गया। समिति के सदस्य व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज गर्ग ने बालक एवं दंपत्ति के स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट का सूक्ष्म आकलन किया। सभी निर्धारित मानकों पर पात्रता सिद्ध होने के बाद जिला कलक्टर की अंतिम स्वीकृति प्राप्त कर बालक को सुपुर्द किया गया।
इस सुखद घटनाक्रम के बीच सहायक निदेशक ने आमजन से एक संवेदनशील अपील भी की है। उन्होंने आग्रह किया कि अनचाहे नवजात शिशुओं को झाड़ियों, कचरे के ढेर या सुनसान स्थानों जैसे असुरक्षित क्षेत्रों में फेंककर उनके जीवन को संकट में न डालें। जिले में ऐसे शिशुओं के संरक्षण हेतु राजकीय चिकित्सालय सवाई माधोपुर, राजकीय दत्तक ग्रहण एजेंसी संप्रेक्षण एवं किशोर गृह, आटूण रोड सवाई माधोपुर तथा सामान्य चिकित्सालय गंगापुर सिटी में सुरक्षित 'पालना गृह' संचालित हैं। इसके अतिरिक्त अभिभावक बाल कल्याण समिति के समक्ष शिशु का विधिक रूप से अभ्यर्पण भी कर सकते हैं, जिससे शिशु का जीवन सुरक्षित रहता है और परित्याग करने वाले व्यक्ति को किसी भी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई का भय नहीं रहता।
निदेशक ने स्पष्ट किया कि जो निःसंतान दंपत्ति बच्चा गोद लेना चाहते हैं, वे पूर्णतः पारदर्शी और कानूनी मार्ग अपनाएं। इच्छुक आवेदनकर्ता “मिशन वात्सल्य” पोर्टल पर स्वयं या ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन के साथ जन्मतिथि, विवाह प्रमाण-पत्र, आय एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य है। कानूनी प्रक्रिया की शुचिता और नियमों की अनुपालना के उपरांत ही पात्र दंपत्तियों को विधिसम्मत रूप से दत्तक ग्रहण का सुखद अवसर प्रदान किया जाता है।

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