सवाई माधोपुर: सीईओ गौरव बुड़ानिया ने किया औचक निरीक्षण, हैंडपंप मरम्मत के निर्देश
आईएएस गौरव बुड़ानिया ने बौंली की ग्राम पंचायतों में पेयजल व्यवस्था जांची, जवाबदेही तय करने के लिए हैंडपंपों पर लागू होगी कलर कोडिंग प्रणाली।

भीषण ग्रीष्मकाल 2026 की आहट के बीच आमजन को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के निर्देशानुसार 18 एवं 19 अप्रैल को संचालित दो दिवसीय विशेष सत्यापन एवं मरम्मत अभियान ने गति पकड़ ली है। इसी क्रम में शनिवार को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव बुड़ानिया (आईएएस) ने पंचायत समिति बौंली क्षेत्र की ग्राम पंचायत मित्रपुरा एवं बोरदा का औचक निरीक्षण कर पेयजल व्यवस्थाओं की धरातलीय स्थिति का जायजा लिया। राज्यव्यापी विशेष अभियान के तहत किए गए इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य खराब हैंडपंपों को शीघ्र दुरुस्त कर ग्रामीण पेयजल ढांचे को कार्यशील बनाना है।
निरीक्षण के दौरान सीईओ गौरव बुड़ानिया ने हैंडपंपों की स्थिति, पाइपलाइन लीकेज और मौजूदा पेयजल बुनियादी ढांचे का मौके पर ही सत्यापन किया। उन्होंने जलदाय एवं पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अभियान की तय अवधि में ही समस्त खराब हैंडपंपों और लीकेज की मरम्मत को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए ताकि गर्मी में जनता को राहत मिल सके। प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से उन्होंने हैंडपंपों के लिए एक नवीन कोडिंग प्रणाली लागू करने का आदेश दिया। इस प्रणाली के तहत जलदाय विभाग के हैंडपंपों को हरे रंग और पंचायतीराज विभाग के हैंडपंपों को पीले रंग से चिह्नित किया जाएगा, जिससे भविष्य में शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल संबंधित विभाग की जवाबदेही तय कर त्वरित समाधान संभव हो सके।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि इस विशेष अभियान के तहत किए जा रहे निरीक्षण, मरम्मत और सत्यापन कार्यों के फोटोग्राफ संकलित कर निर्धारित समयसीमा में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कार्यों की वास्तविक उपयोगिता के आकलन पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि आवश्यक मरम्मत कार्य उसी दिन पूरे किए जाएं और कार्यों में किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही कतई स्वीकार्य नहीं होगी। पेयजल व्यवस्था के साथ-साथ उन्होंने ग्राम पंचायत कार्यालय बोरदा एवं मित्रपुरा का निरीक्षण कर अभिलेख संधारण, स्वच्छता और प्रशासनिक कामकाज की भी समीक्षा की तथा आवश्यक सुधार हेतु निर्देशित किया। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप संचालित यह अभियान न केवल जल संकट के निवारण का माध्यम है, बल्कि सतत मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षणों के जरिए सरकारी मशीनरी की गंभीरता को भी रेखांकित करता है।

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