ग्रीष्म ऋतु के प्रचंड प्रकोप और रिकॉर्ड तोड़ते तापमान के बीच सवाई माधोपुर में गौवंश के जीवन की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की गई है। बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाने के कारण बेजुबान पशुओं को सीधे तौर पर हीट स्ट्रोक अथवा सन स्ट्रोक (लू-तापघात) का भारी खतरा मंडरा रहा है। पशुओं को अत्यधिक ऊंचे तापमान पर अधिक देर तक रखने या गर्म हवा के थपेड़ों के सीधे संपर्क में आने से होने वाले इस जानलेवा खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इस गंभीर स्थिति से निपटने और गौशालाओं में संधारित गौवंश को काल कवलित होने से बचाने के लिए पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने एक विस्तृत और अनिवार्य एडवाइजरी जारी की है।

संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग द्वारा जारी इस आधिकारिक एडवाइजरी में जिले के समस्त गौशाला संचालकों को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे गौवंश की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे स्वच्छ एवं ठंडे पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, पशुओं के बैठने के स्थान पर पर्याप्त छाया की व्यवस्था की जाए। शेड को झुलसाने वाली गर्म हवाओं के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए उसे तिरपाल अथवा टाट और बोरों से पूरी तरह ढका जाए। एडवाइजरी में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि इन टाट और बोरों पर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी का छिड़काव किया जाता रहे, ताकि बाहर से छनकर आने वाली हवा में ठंडक बनी रहे और परिसर का तापमान नियंत्रित रहे। गौशालाओं में यथासंभव पंखे या कूलर का उपयोग करने की हिदायत दी गई है और यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में गौवंश को धूप में खुला न रखा जाए।

बेजुबान पशुओं के पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए एडवाइजरी में आहार प्रबंधन के सूक्ष्म निर्देश भी शामिल किए गए हैं। समस्त गौशालाओं को निर्देश दिया गया है कि वे गौवंश के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा, भूसा, पानी एवं पशु आहार की समुचित व्यवस्था हर समय तैयार रखें। पशु आहार में आवश्यक संतुलन स्थापित करने के लिए अजोला घास का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जबकि ग्रीष्मकालीन पोषण को देखते हुए आहार में गेहूं के चोकर एवं जौ की मात्रा को तुरंत बढ़ा देने के आदेश दिए गए हैं।

इस पूरी व्यवस्था में बीमार तथा अशक्त गौवंश की सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी एवं चिकित्सकीय प्रावधान लागू किए गए हैं, जिसके तहत ऐसे कमजोर पशुओं के उपचार की पूरी व्यवस्था संबंधित पशु चिकित्सा कार्मिकों की सीधी देखरेख और निगरानी में ही की जाएगी। स्वास्थ्यप्रद वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से गौशाला परिसर में प्रतिदिन अनिवार्य रूप से सघन साफ-सफाई कराई जाएगी तथा गोबर एवं गंदे पानी का नियमित व त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। मक्खी, मच्छर एवं अन्य जनित कीटों की रोकथाम के लिए संपूर्ण परिसर में कीटनाशक स्प्रे किया जाना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी गौवंश की मृत्यु होती है, तो संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मृत गौवंश के शव का निस्तारण यथाशीघ्र पूर्णतः वैज्ञानिक विधि एवं सम्मानजनक ढंग से करने के सख्त आदेश दिए गए हैं, ताकि भीषण गर्मी के कारण शव में पुट्रिफिकेशन यानी विघटन की प्रक्रिया शुरू न हो पाए और क्षेत्र में किसी भी प्रकार की महामारी या अन्य गंभीर बीमारी का खतरा उत्पन्न न होने पाए। पशुपालन विभाग की यह त्वरित और संवेदनशील पहल सवाई माधोपुर में गौवंश के संरक्षण और इस भीषण प्राकृतिक आपदा में उनके जीवन की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story