सवाई माधोपुर। गुलाबी नगरी के पड़ोसी जिले सवाई माधोपुर में प्रकृति के बदलते मिजाज और गिरते पारे ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। जिले में लगातार पैर पसार रही भीषण शीत लहर और फसलों को तबाह कर देने वाले पाले (तुषार) की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। किसानों की मेहनत को बर्बादी से बचाने के लिए विभाग ने एक विस्तृत और रणनीतिक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक समाधानों तक को शामिल किया गया है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (विस्तार) राकेश कुमार अटल ने इस संकट की घड़ी में किसानों से समय रहते मोर्चा संभालने और फसलों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कवच अपनाने की पुरजोर अपील की है।

शीत लहर के इस तांडव से निपटने के लिए संयुक्त निदेशक राकेश कुमार अटल ने मनोवैज्ञानिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने बताया कि जिन रातों में पाला पड़ने की प्रबल संभावना हो, वहां किसान आधी रात के बाद यानी 12 बजे से 2 बजे के बीच सक्रिय हो जाएं। खेत की उत्तरी-पश्चिमी दिशा, जहां से बर्फीली हवाएं आती हैं, वहां मेड़ों पर कूड़ा-कचरा और सूखी घास जलाकर धुआं करना एक अचूक उपाय साबित हो सकता है। यह धुएं की घनी परत वातावरण में ऊष्मा को रोककर खेत के तापमान को करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा देती है, जो फसल को जमने से बचाने के लिए पर्याप्त है।

नाजुक और कीमती फसलों के लिए विभाग ने विशेष सुरक्षा तंत्र का सुझाव दिया है। नर्सरी, उद्यानों और नकदी सब्जियों को बचाने के लिए उन्हें टाट, पॉलीथिन या भूसे से ढंकना अनिवार्य बताया गया है। इसके साथ ही, सिंचाई को पाले के विरुद्ध सबसे प्रभावी हथियार माना गया है। नम भूमि में गर्मी सोखने की क्षमता अधिक होती है, जिससे सर्दी के मौसम में सिंचाई करने पर खेत का तापमान 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जो फसलों के लिए जीवनदान समान है।

वैज्ञानिक समाधानों पर प्रकाश डालते हुए राकेश कुमार अटल ने घुलनशील गंधक चूर्ण के प्रयोग पर बल दिया है। उन्होंने सलाह दी है कि फसलों पर 0.2 प्रतिशत गंधक के घोल का छिड़काव किया जाए, जिसका असर लगभग दो सप्ताह तक बना रहता है। यह छिड़काव न केवल सरसों, गेहूं, चना और आलू जैसी फसलों को पाले से बचाता है, बल्कि पौधों में लौह तत्व की सक्रियता बढ़ाकर उनकी रोग-रोधक क्षमता को भी सुदृढ़ करता है। भविष्य की सुरक्षा के लिए उन्होंने खेतों की सीमाओं पर शहतूत, शीशम, खेजड़ी और जामुन जैसे वायु अवरोधक वृक्ष लगाने का सुझाव दिया है, ताकि प्रकृति के इस प्रकोप से स्थाई सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन और विभाग की यह मुस्तैदी जिले के कृषि परिदृश्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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