सवाई माधोपुर। विकास के दावों और हकीकत के बीच की खाई जब गहरी होती है, तो वह आम जनमानस के लिए जानलेवा साबित होने लगती है। सवाई माधोपुर में शिवपुरी–ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग 552 को जोड़ने वाली बोदल गांव के समीप स्थित ओघाड़ पुलिया आज इसी बदहाली का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। यह पुलिया अब केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि हादसों को खुला निमंत्रण देने वाला एक डरावना मार्ग बन गई है। हैरानी की बात यह है कि जिस पुलिया के जीर्णोद्धार के नाम पर क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र गोठवाल और वन मंत्री संजय शर्मा ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं, आज वही पुलिया अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है और जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं।

विगत बरसात के मौसम में जब पुलिया जर्जर हुई थी, तब क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र गोठवाल ने वन मंत्री संजय शर्मा के साथ लाव-लश्कर लेकर मौके का मुआयना किया था। उस दौरान मीडिया के कैमरों के सामने यह संदेश प्रसारित किया गया कि पुलिया के नए सिरे से निर्माण के लिए सरकार गंभीर है और मंत्री जी से इसके लिए विशेष गुहार लगाई गई है। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि इस निरीक्षण के अगले ही दिन भारी बारिश हुई और पुलिया का एक बड़ा हिस्सा बह गया। इसके बाद विधायक गोठवाल पुनः सक्रिय हुए और आनन-फानन में अस्थायी मरम्मत करवाकर आवागमन तो बहाल करवा दिया, लेकिन वह 'अस्थायी समाधान' आज छह महीने बाद भी जस का तस बना हुआ है।

मौके पर मौजूद जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है। मरम्मत के नाम पर जो मिट्टी डाली गई थी, वह समय के साथ बह चुकी है और अब वहां गहरे गड्ढे उभर आए हैं। पुलिया पर सुरक्षा के नाम पर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, न ही साइड सेफ्टी के लिए कोई रेलिंग या संकेतक लगाए गए हैं। वर्तमान में हालात यह हैं कि यदि दो वाहन आमने-सामने आ जाएं, तो उनके पास बचने के लिए कोई जगह नहीं बचती। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और रात के अंधेरे में सफर करने वाले राहगीरों के लिए यह पुलिया किसी 'डेथ ट्रैप' से कम नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है; उनका स्पष्ट आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने केवल वाहवाही लूटने के लिए फोटो खिंचवाए, जबकि धरातल पर केवल लिपापोती की गई है।

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पुलिया का स्थायी निर्माण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस संवेदनशील मामले में अब देखना यह है कि क्या वन मंत्री संजय शर्मा और विधायक जितेंद्र गोठवाल अपनी घोषणाओं को धरातल पर उतारते हैं या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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