सवाई माधोपुर के बजरिया स्थित मानटाउन क्लब में पिछले कई दिनों से चल रहे भक्तिमय आध्यात्मिक अनुष्ठान 'श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ' का आज समापन दिवस है। अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) सवाई माधोपुर के तत्वाधान में आयोजित इस दिव्य कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से पूज्य दयालु गौर दास प्रभु जी श्रद्धालुओं को धर्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराएंगे। समापन के अवसर पर पूर्णाहुति के साथ महा आरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु भाग लेंगे।





सांय 7:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक आयोजित इस कथा में पूज्य दयालु गौर दास प्रभु जी ने सनातन संस्कृति और भक्ति मार्ग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि 'मैं और मेरा' का भाव ही मानवीय दुखों का मूल कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य द्वारा अर्जित धन और स्वयं का शरीर भी ईश्वर की ही देन है, इसलिए इसे अहंकार के बजाय प्रभु की सेवा में समर्पित करना चाहिए। उन्होंने शंकराचार्य के भज-गोविंद स्तोत्र का उदाहरण देते हुए युवाओं और नागरिकों को व्याकरण रटने के बजाय गोविंद के भजन और हरिनाम संकीर्तन को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। प्रभु जी ने भक्ति और मुक्ति के अंतर को समझाते हुए बताया कि सच्चा वैष्णव भक्त ब्रह्म में लीन होने के बजाय जन्म-जन्मान्तर तक भगवान की सेवा में तत्पर रहता है।

कथा के दौरान पूरा वातावरण भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रसंगों से गुंजायमान रहा, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। आज अंतिम दिवस के अवसर पर आयोजन समिति ने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कथा श्रवण का लाभ लेने और महाप्रसाद ग्रहण करने की अपील की है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहा है, बल्कि क्षेत्र में धर्म और संस्कृति के प्रति जन-जागरूकता का एक जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है।

Pratahkal Newsroom

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