शहर के बजरिया क्षेत्र में विकास कार्यों की आड़ में की जा रही हरे-भरे एवं पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई के खिलाफ लगातार विरोध तेज होता जा रहा है। बीते कई दिनों से व्यापारी, पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और अब वकीलों के प्रतिनिधिमंडल भी सड़कों और प्रशासनिक स्तर पर एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का हवाला

व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर सवाई माधोपुर को बार-बार ज्ञापन सौंपकर चेताया है कि बजरिया क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका है, जहां पेड़ों की मौजूदगी पर्यावरण संतुलन, तापमान नियंत्रण और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा:

"पेड़ों को जीवित रखना भी विकास की बुनियादी शर्त है, न कि उन्हें काटकर तथाकथित विकास किया जाए।" – अशोक जैन, ज्ञानेंद्र दत्त शर्मा एवं दिनेश गर्ग

प्रशासन के दावों पर सवाल

प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच पेड़ों की संख्या को लेकर मतभेद गहरा गया है:

  • प्रशासन का पक्ष: केवल 30 से 32 पेड़ ही काटे जाने प्रस्तावित हैं।
  • मौके पर मौजूद लोगों का दावा: करीब 60 पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं।
  • वर्तमान स्थिति: 100 से अधिक पेड़ों पर अब भी खतरा बना हुआ है।
कानूनी उल्लंघन और वकीलों का हस्तक्षेप

वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को अलग से पत्र सौंपते हुए इस पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और निर्णयों का खुला उल्लंघन बताया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि:

"मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद आधी रात, सुबह और शाम ढलते ही पेड़ों की कटाई कराई जा रही है, जो पूरी तरह अवैध है।"

वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के पेड़ कटाई पर आधारित विकास को लेकर स्थानीय लोग सहमत नहीं हैं, क्योंकि किसी भी विकास योजना में पेड़ एक प्रमुख और अनिवार्य हिस्सा होते हैं। बड़े, पुराने और हरे-भरे पेड़ों को काटना न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि मानवीय मूल्यों और प्रकृति के खिलाफ अपराध है।

आंदोलन की चेतावनी

लगातार हो रहे विरोध के बीच व्यापारियों ने स्पष्ट ऐलान किया है कि अब एक भी पेड़ नहीं काटने दिया जाएगा। यदि कटाई नहीं रुकी तो व्यापक और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर दबाव लगातार बढ़ाया जाएगा।

विरोध में शामिल प्रमुख व्यक्ति

वकीलों का प्रतिनिधिमंडल:

  • जगन्नाथ चौधरी, राजेश मीणा, प्रेमराज मीणा, एडवोकेट मुकेश भूप्रेमी, दिलीप राजावत, भरतलाल बैरवा, भागचंद मीणा।

व्यापारी और नागरिक:

  • रत्नाकर गोयल, रामप्रताप सिंह चौहान, वीरेंद्र गुप्ता, विपिन अग्रवाल, शंकर लाल, महावीर सिंघल, सुनील कुमार जैन, देवेंद्र कुमार जांगिड़, राजेंद्र मथुरिया, मनीष कुमार गोयल, सतीश जैन, अवधेश शर्मा, अशोक जैन, यशवंत भूप्रेमी, राजकुमार दोसाया, राजेश शर्मा, संजय गौतम, तरुण, डी.के. जैन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
Pratahkal Bureau

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