सवाई माधोपुर: अर्हत मुनि ने बताए सम्मान पाने के पांच अचूक सूत्र, तेरापंथ भवन में उमड़ा जनसैलाब
सवाई माधोपुर के तेरापंथ भवन में मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने "मेरी तो कोई इज्जत ही नहीं है" विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने समाज में सम्मान पाने के लिए पांच विशेष सूत्र बताते हुए निस्वार्थ सेवा, वाणी संयम और गोपनीयता के महत्व को समझाया। मुनिश्री भरत कुमारजी ने भी लोक स्वरूप पर विचार रखे। जानिए कैसे मुनिश्री के ये सूत्र बदल सकते हैं आपका जीवन।

सवाई माधोपुर, 2 जनवरी 2026। समाज में अपनी विशिष्ट पहचान और सम्मान पाने की लालसा हर व्यक्ति के भीतर होती है, किंतु अक्सर लोग इस बात से व्यथित रहते हैं कि उन्हें अपेक्षित आदर प्राप्त नहीं हो रहा है। इसी ज्वलंत मानवीय समस्या का समाधान करते हुए युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने आदर्श नगर स्थित तेरापंथ भवन में आयोजित एक विशेष प्रवचन सभा को संबोधित किया। "मेरी तो कोई इज्जत ही नहीं है" जैसे मर्मस्पर्शी विषय पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान की।
मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने प्रवचन की शुरुआत करते हुए कहा कि सम्मान मांगकर नहीं, बल्कि अपने आचरण और व्यवहार से अर्जित किया जाता है। उन्होंने इज्जत में वृद्धि हेतु पांच सूत्रीय जीवन दर्शन को अपनाने का आह्वान किया। मुनिश्री ने जोर देकर कहा कि यदि हम दूसरों के प्रति सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग करेंगे, तो प्रतिफल के रूप में हमें सकारात्मक सम्मान स्वतः ही प्राप्त होगा। उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक पक्ष रखते हुए बताया कि दूसरों को खुश करने की होड़ में हर बात पर 'हाँ' कहना आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाता है, अतः व्यक्ति को आवश्यकतानुसार 'ना' कहना भी सीखना चाहिए।
प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने निस्वार्थ भाव की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति नाम और प्रसिद्धि की चाह रखे बिना कार्य करते हैं, समाज उन्हें स्वतः ही ऊंचे पायदान पर बिठा देता है। उन्होंने आगे बताया कि अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए दूसरों के अच्छे कार्यों की प्रशंसा करना और उनकी पीठ थपथपाना एक महान गुण है। अंतिम सूत्र के रूप में उन्होंने गोपनीयता की मर्यादा को रेखांकित किया। मुनिश्री के अनुसार, जो व्यक्ति दूसरों की गुप्त बातों को पचाने की क्षमता रखता है और किसी का मर्म उद्घाटित नहीं करता, वही वास्तव में इज्जत का पात्र बनता है। उन्होंने पड़ोसी के साथ मधुर संबंधों को जीवन के सात सुखों में से एक महत्वपूर्ण सुख बताया और वाणी संयम हेतु मौन की महत्ता पर बल दिया।
इस गरिमामयी आध्यात्मिक कार्यक्रम के पूर्व मुनिश्री भरत कुमारजी ने ब्रह्मांड और लोक के स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया। मुनिश्री भरत कुमारजी ने तीर्थंकर भगवान के प्रति अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हुए उपस्थित जनसमूह को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। सभा के अंत में जानकारी दी गई कि आगामी दिवस मुनिश्री "अब क्या करें?" जैसे प्रेरणास्पद विषय पर जनमानस का मार्गदर्शन करेंगे। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित इस प्रवचन माला ने स्थानीय समाज में वैचारिक परिवर्तन की एक नई लहर पैदा की है।

Pratahkal Bureau
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