सवाई माधोपुर, 24 जुलाई। जिले में लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग ने खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन और सुरक्षा के लिए किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) लखपत लाल मीणा ने किसानों से अपील की है कि वे वर्षा के बाद उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा फसलों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दें।

संयुक्त निदेशक कृषि ने बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण और फसलों की नियमित देखभाल से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को कृषि विभाग द्वारा जारी परामर्श का पालन करने की सलाह दी है।

उन्होंने बताया कि मक्का फसल में वर्तमान समय में यूरिया का प्रयोग नहीं किया जाए। वर्षा के बाद जब जड़ों का पर्याप्त विकास हो जाए, तभी अनुशंसित मात्रा में विभाजित खुराक के रूप में यूरिया का उपयोग करें। आवश्यकता से अधिक यूरिया का प्रयोग करने से फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है।

कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में जल निकास की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वर्षा रुकने और मौसम साफ होने के बाद ही कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार पौध संरक्षण रसायनों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। संयुक्त निदेशक ने उड़द, मूंग और सोयाबीन जैसी दलहनी फसलों में अनावश्यक यूरिया के प्रयोग से बचने तथा फसलों का नियमित निरीक्षण करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि किसान मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म, तना छेदक एवं पत्ती झुलसा, दलहनी फसलों में पीला मोजेक, पाउडरी मिल्ड्यू एवं तना मक्खी तथा सब्जी फसलों में फल छेदक, लीफ माइनर, सफेद मक्खी एवं थ्रिप्स जैसे कीट एवं रोगों की लगातार निगरानी करें। इनकी प्रारंभिक अवस्था में ही कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाने से फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

संयुक्त निदेशक कृषि ने किसानों से समय पर खरपतवार नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने, गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों का उपयोग करने और किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विभाग के अधिकारियों से वैज्ञानिक परामर्श लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित उर्वरक उपयोग से फसल उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

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