आदर्श नगर (सवाई माधोपुर)। धर्म और अध्यात्म की नगरी सवाई माधोपुर के आदर्श नगर में रविवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जब तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में आयोजित 'अभिनव सामायिक फेस्टिवल' में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान ने न केवल जनमानस को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि इंदौर में यशस्वी चातुर्मास संपन्न कर पद विहार के माध्यम से पधारे युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री अर्हत कुमारजी, मुनिश्री भरत कुमारजी एवं मुनिश्री जयदीप कुमारजी के पावन सानिध्य ने वातावरण को पूर्णतः धर्ममय बना दिया।

स्थानीय तेरापंथ भवन के खचाखच भरे सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री भरत कुमारजी द्वारा सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं को अभिनव सामायिक का सामूहिक प्रत्याख्यान करवाने के साथ हुआ। मुनिश्री ने अत्यंत कुशलता के साथ उपस्थित जनसमूह को सामूहिक त्रिपदी वंदना, परमेष्ठी वंदना, जप योग, प्रेक्षाध्यान और त्रिगुप्ती की साधना के माध्यम से अभिनव सामायिक के वास्तविक स्वरूप से साक्षात्कार कराया। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मुनिश्री जयदीप कुमारजी ने अपनी सुमधुर वाणी में एक प्रेरक गीतिका प्रस्तुत की, जिसके माध्यम से उन्होंने सामायिक की महत्ता को जन-जन के हृदय तक पहुंचाया।

स्वाध्याय योग के सत्र में मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने ज्ञान की अविरल धारा बहाते हुए श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने बल देते हुए कहा कि सामायिक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा में समता भाव को पुष्ट करने की एक गहन साधना है। मुनिश्री ने समझाया कि 48 मिनट की मात्र एक सामायिक व्यक्ति को 84 लाख जीव योनियों के आवागमन से मुक्ति दिला सकती है। यह साधना 24 तीर्थंकरों की आज्ञा का सार है और श्रावक के 12 अनिवार्य व्रतों में शुमार है। उन्होंने मन, वचन और काया की चंचलता को समाप्त करने का आह्वान करते हुए श्रद्धालुओं को प्रतिदिन के 24 घंटों में से केवल 48 मिनट निकालकर शुद्ध सामायिक का अभ्यास करने की प्रेरणा दी।

मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने आध्यात्मिक गहराई के साथ बताया कि यदि सामायिक के दौरान मन के 10, वचन के 10 और काया के 12 दोषों से बचने का पुरुषार्थ किया जाए, तो वह सामायिक उच्च कोटि की श्रेणी में आती है और साधक को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है। कार्यक्रम के अंतिम चरणों में परिषद के मंत्री धर्म जैन ने सामायिक आलोचना की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अंत में तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष भीकम जैन ने इस भव्य आयोजन में सम्मिलित हुए सभी श्रावक-श्राविकाओं एवं सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह फेस्टिवल न केवल आध्यात्मिक चेतना जगाने में सफल रहा, बल्कि समाज को एकता और समता के सूत्र में पिरोने का एक सशक्त माध्यम भी बना।

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