सवाई माधोपुर: मानसिक स्वास्थ्य की जंग में न्याय और चिकित्सा का अनूठा संगम, नर्सिंग छात्रों को सिखाए स्वस्थ जीवन के गुर
सवाई माधोपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सचिव समीक्षा गौतम और डॉ. गौरव चंद्रवंशी ने नालसा योजना 2024 और तनाव प्रबंधन पर जानकारी दी। ट्रोमा सेंटर में मरीजों को कानूनी सहायता प्रदान करते हुए FIR और पेंशन के आवेदन भी लिए गए। जानिए कैसे न्याय और स्वास्थ्य सेवा ने मिलकर रचा इतिहास।

सवाई माधोपुर। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच जब मन की शांति खोने लगती है, तब जागरूकता की एक किरण पूरे समाज को नई दिशा दिखा सकती है। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में सोमवार को सवाई माधोपुर के राजकीय सामान्य चिकित्सालय के सभागार में एक ऐसी ही महत्वपूर्ण पहल देखी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समीक्षा गौतम के नेतृत्व में आयोजित इस 'मानसिक स्वास्थ्य विधिक जागरूकता कार्यक्रम' ने न केवल नर्सिंग छात्रों को उनके अधिकारों से परिचित कराया, बल्कि मानसिक रोगों के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान किया।
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र 'नालसा (मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक रूप से असक्षम व्यक्तियों को विधिक सेवाएं) योजना 2024' रही। सचिव समीक्षा गौतम ने उपस्थित नर्सिंग विद्यार्थियों को इस योजना के व्यापक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार मानसिक स्वास्थ्य कार्यस्थल की उत्पादकता और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। उन्होंने मनोसामाजिक जोखिमों के प्रबंधन और कार्यस्थल पर कर्मचारियों के बीच आपसी मेलजोल व सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया, ताकि एक स्वस्थ कार्य परिवेश का निर्माण हो सके। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना केवल एक चिकित्सा आवश्यकता नहीं, बल्कि एक विधिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
इसी क्रम में चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ मनोचिकित्सक डॉ. गौरव चंद्रवंशी ने उपस्थित जनसमूह को मानसिक रोगों की गंभीरता से अवगत कराया। डॉ. चंद्रवंशी ने बेहद मर्मस्पर्शी ढंग से कहा कि आज लगभग हर घर में कोई न कोई सदस्य तनाव की चपेट में है। उन्होंने आगाह किया कि साधारण दिखने वाला तनाव समय पर उपचार न मिलने पर जटिल मानसिक रोग या पागलपन का रूप ले सकता है। उन्होंने समाधान के रूप में काउंसलिंग, योग और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, योग मात्र एक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक रोगों से बचने का एक अभेद्य कवच है।
इस गरिमामयी आयोजन में डॉ. एस.एन. अग्रवाल (प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सामान्य चिकित्सालय सवाई माधोपुर), श्रीमती सिंधु (औषधि नियंत्रक अधिकारी), श्री नंद किशोर वर्मा (पैनल अधिवक्ता) और श्री अक्षय राजावत (सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल) सहित चिकित्सालय के अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विस्तार केवल सभागार तक सीमित नहीं रहा; पैनल अधिवक्ताओं और अधिकार मित्रों ने मानवता की सेवा की मिसाल पेश करते हुए अस्पताल के ट्रोमा सेंटर और जनरल वार्ड का दौरा किया। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों को दुर्घटना से संबंधित कानूनी अधिकारों और प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाने की जटिल प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया।
'न्याय आपके द्वार' अभियान के तहत मौके पर ही जन समस्याओं का समाधान भी किया गया। इस दौरान एफआईआर दर्ज कराने के लिए 8, यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए 3 और पेंशन सुचारू करने के लिए 1 आवेदन प्राप्त किया गया। कुल मिलाकर 10 से अधिक महत्वपूर्ण आवेदनों पर कार्यवाही सुनिश्चित की गई। यह कार्यक्रम न केवल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि इसने यह भी सिद्ध कर दिया कि जब न्याय और चिकित्सा हाथ मिलाते हैं, तो समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना संभव हो जाता है।

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