सवाई माधोपुर, 14 जनवरी। जिले में मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर पर लगाम लगाने और स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में सवाई माधोपुर में नव नियुक्त नर्सिंग स्टाफ के लिए एक विशेष 'दक्षता प्रशिक्षण' कार्यक्रम का आगाज किया गया, जो जिले की स्वास्थ्य प्रणाली में मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रशिक्षण का मूल मंत्र न केवल सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है, बल्कि प्रसव के दौरान होने वाली आकस्मिक जटिलताओं को भांपकर मां और बच्चे की अनमोल जिंदगी को बचाना भी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने इस पहल की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लेबर रूम में तैनात नर्सिंग स्टाफ ही किसी भी अस्पताल की रीढ़ होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस गहन प्रशिक्षण से स्टाफ की कार्यशैली में न केवल निखार आएगा, बल्कि तकनीकी रूप से वे इतने सक्षम हो जाएंगे कि संस्थागत प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार देखने को मिलेगा। डॉ. जेमिनी के अनुसार, यह प्रशिक्षण सीधे तौर पर चिकित्सा सेवाओं के प्रति जनता के भरोसे को मजबूत करेगा।

इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान यूएनएफपीए के विशेषज्ञ प्रशिक्षक सुशील गोयल एवं आदित्य तोमर ने नर्सिंग कर्मियों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के गुर सिखाए। प्रशिक्षण की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें साक्ष्य-आधारित प्रसव देखभाल से लेकर नवजात पुनर्जीवन जैसे संवेदनशील विषयों पर सूक्ष्मता से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव पश्चात रक्तस्राव) के प्रबंधन और रेफरल प्रोटोकॉल की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि किस प्रकार समय पर लिया गया एक सही निर्णय दो जिंदगियों को जीवनदान दे सकता है।

प्रशिक्षण को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए डमी डेमोंस्ट्रेशन, वास्तविक केस स्टडी और इंटरएक्टिव चर्चाओं का सहारा लिया गया। सुशील गोयल और आदित्य तोमर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि लेबर रूम में मानक उपचार दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है, ताकि प्रत्येक प्रसूता को सुरक्षित और सम्मानजनक मातृत्व देखभाल मिल सके। संक्रमण नियंत्रण के कड़े उपायों को भी इस कार्यशाला का हिस्सा बनाया गया।

सवाई माधोपुर में आयोजित यह दक्षता प्रशिक्षण केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और संवेदनशीलता की दिशा में बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है। जब कुशल हाथों में तकनीकी विशेषज्ञता का समावेश होता है, तो वह व्यवस्था न केवल बेहतर बनती है बल्कि मानवीय संवेदनाओं के धरातल पर भी खरी उतरती है। यह पहल आने वाले समय में जिले की स्वास्थ्य रैंकिंग में सुधार लाने के साथ-साथ सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगी।

Pratahkal Bureau

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