सवाई माधोपुर, 20 जनवरी। राजस्थान के प्राकृतिक वैभव को सहेजने और वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में आज सवाई माधोपुर ने एक बड़ी छलांग लगाई है। राजस्थान वन विभाग और फ्रांस सरकार के रणनीतिक सहयोग से संचालित 'राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना' (RFBDP) के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्संबंधों को उजागर किया, बल्कि सामुदायिक भागीदारी की एक नई मिसाल पेश की। रणथम्भौर की इस पावन धरा पर आयोजित इस कार्यक्रम में 65 जांबाज प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वन विभाग के फ्रंटलाइन वॉरियर्स—रेंजर, फॉरेस्टर, फॉरेस्ट गार्ड—के साथ-साथ ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समिति, पारिस्थितिकी विकास समिति और पीएफटी के जागरूक सदस्य शामिल हुए।

इस महत्वपूर्ण आयोजन का आगाज करते हुए मानस सिंह, उपवन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक, रणथम्भौर बाघ परियोजना ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि बदलते परिवेश में वन विभाग के फील्ड स्टाफ और ग्राम स्तरीय समितियों की क्षमता वृद्धि अनिवार्य है। मानस सिंह ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की चुनौतियों से निपटने और पारिस्थितिक तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होते हैं।

प्रशिक्षण सत्रों की कमान परियोजना के लब्धप्रतिष्ठ विषय विशेषज्ञों ने संभाली। मनीषा जानी, डॉ. आशीष अंथवाल और सुमित माहेश्वरी ने बारी-बारी से विभिन्न तकनीकी और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने पर्यावरण एवं सामाजिक प्रबंधन प्रणाली के साथ-साथ लैंगिक समानता जैसे समसामयिक विषयों पर संवाद किया। इस दौरान सबसे रोमांचक सत्र जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक का रहा, जहाँ फॉरेस्ट फील्ड स्टाफ को जीपीएस आधारित मोबाइल मैपिंग एप्लीकेशन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डिजिटल इंडिया के इस दौर में वनों की निगरानी और डेटा प्रबंधन के लिए यह तकनीक एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।

प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों के चेहरों पर एक नई ऊर्जा और समझ का भाव स्पष्ट था। उपस्थित कर्मियों ने इस पहल को अत्यंत प्रभावी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि आर.एफ.बी.डी.पी. परियोजना के विभिन्न घटकों को गहराई से समझने के बाद अब वे फील्ड में अधिक कुशलता से कार्य कर सकेंगे। सामूहिक स्वर में यह मांग भी उठी कि पर्यावरण संतुलन और वन विकास की गति को बनाए रखने के लिए ऐसे तकनीकी और व्यावहारिक सत्रों का नियमित आयोजन होता रहना चाहिए। यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण मात्र नहीं था, बल्कि राजस्थान के हरित भविष्य को सुरक्षित करने का एक संकल्प था।

Pratahkal Newsroom

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