पांचना के हक के लिए 411 गांवों का हुंकार: खण्डीप महापंचायत बनी जनांदोलन का केंद्र
सपोटरा के 411 गांवों के किसान पानी के अधिकार के लिए खण्डीप में महासंग्राम कर रहे हैं। 18 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना अब एक विशाल जनआंदोलन बन चुका है। क्या सरकार कोर्ट के आदेश का पालन करेगी या किसानों का यह संघर्ष और भड़केगा?

खण्डीप में आयोजित किसान महापंचायत में पांचना बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग को लेकर जुटे किसान और स्थानीय प्रतिनिधि।
सपोटरा तहसील के 411 गांवों के हजारों किसानों, पंच-पटेलों और युवाओं का विशाल जनसमूह सोमवार को खण्डीप की धरती पर एक नई इबारत लिखने के लिए एकजुट हुआ। पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में सिंचाई का पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर पिछले 18 दिनों से जारी किसान महापंचायत आज एक विराट जनांदोलन के रूप में तब्दील हो गई। सैंकड़ों वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे किसानों का स्वागत पांचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति और स्थानीय विधायक रामकेश मीना ने जेसीबी से पुष्पवर्षा कर किया। आंदोलन की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धरना स्थल पर तिल रखने की जगह नहीं बची और बड़ी संख्या में लोग पांडाल के बाहर सड़कों पर डटे रहे।
स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खण्डीप के ग्रामीण स्वयंसेवी भूमिका निभाते हुए हजारों लोगों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा उठाए हुए हैं। आंदोलन की गूंज मंच तक पहुंची, जहां पूर्व मंत्री गोलमादेवी, पूर्व विधायक सुरेशचन्द मीना, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पी.आर. मीना और हुकमबाई मीना सहित अन्य वक्ताओं ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि सरकार माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का अविलंब पालन सुनिश्चित करे और किसानों को उनके हक का पानी उपलब्ध कराए।
विधायक रामकेश मीना ने उमड़े जनसैलाब का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संघर्ष अब केवल पानी की मांग तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वाभिमान और जल अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। मंच से स्पष्ट संदेश दिया गया कि किसान सरकार से कोई भीख नहीं, बल्कि अपना जायज हक मांग रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। सरकार की उदासीनता पर प्रहार करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जो तंत्र अन्नदाता की प्यास नहीं बुझा सकता, उसका सत्ता में बने रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि खण्डीप की यह महापंचायत स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक पानी नहीं, तब तक संघर्ष थमेगा नहीं।

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