बच्चों के भीतर रोपित किए गए उच्च संस्कार और नैतिक शिक्षा ही एक सभ्य समाज एवं उज्जवल भविष्य की आधारशिला रखते हैं। इसी पावन उद्देश्य के साथ संत निरंकारी मंडल के तत्वाधान में सवाई माधोपुर के चंदन गार्डन में कोटा जोन के भव्य 'निरंकारी बाल सत्संग' (बाल समागम) कार्यक्रम का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस विशेष समागम में विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों बच्चों ने रंगारंग व प्रेरणादायक गीतों, नाटकों, कविताओं और कव्वालियों के माध्यम से संपूर्ण समाज को मानवता, आपसी सौहार्द तथा नैतिक मूल्यों का एक बेहद सशक्त और विहंगम संदेश दिया।

इस भव्य बाल समागम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पलवल से पधारे आदरणीय संत श्री डॉ. कमल सिंह जी ने उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को दिव्य प्रवचनों से निहाल किया। डॉ. कमल सिंह जी ने अत्यंत गहराई से इस बात को रेखांकित किया कि बचपन से ही बच्चों में मानवता के सर्वोत्तम गुण पैदा करना अनिवार्य है, क्योंकि अच्छे संस्कार ही अंततः बच्चों को मानवता की सच्ची राह पर आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बाल मन की तुलना करते हुए कहा कि बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं, उन्हें बचपन में जैसा ढाला जाए, वे वैसे ही ढल जाते हैं। माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों को हमेशा अच्छी व प्रेरणादायक बातें बतानी चाहिए, जिससे उनके भीतर सकारात्मक विचारों का संचार हो सके। समकालीन चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित करते हुए संत जी ने कर्तव्यबोध कराया कि माता-पिता बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक प्रयोग से दूर रखें और अत्यंत आवश्यकता होने पर ही इसका सदुपयोग सुनिश्चित करें।

आध्यात्मिक ऊर्जा पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कमल सिंह जी ने कहा कि निष्काम सेवा, सिमरन और सत्संग से जीवन में असीम ऊर्जा आती है तथा आत्मिक सुकून प्राप्त होता है। बच्चों के भीतर हमेशा प्रभु निरंकार के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास को जगाना चाहिए, क्योंकि सारे ब्रह्मांड और संपूर्ण सृष्टि में एक ही निरंकार ईश्वर बेअंत सुप्रीम पावर के रूप में विद्यमान है। वह हर जगह मौजूद है और सृष्टि के कण-कण, रोम-रोम तथा हर मानव में उसी प्रभु का पवित्र अंश समाहित है। गुरु के सिद्धांतों को समझाते हुए उन्होंने आह्वान किया कि कभी भी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए, क्योंकि सतगुरु की असीम कृपा से ही प्रभु निरंकार की वास्तविक अनुभूति संभव होती है। समाज में फैले भेदभाव पर कड़ा प्रहार करते हुए संत जी ने कहा कि हमें जाति-पाति, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, देश-विदेश और काले-गोरे का भेद मिटाकर जीना चाहिए, क्योंकि हम सब अंततः एक ही प्रभु निरंकार की संतान हैं।

समागम को आगे बढ़ाते हुए कोटा जोन के जोनल इंचार्ज संत बृजराज सिंह जी यादव ने रामचरितमानस की चौपाई 'अब भाव मोह हनुमंत भरोसा, बिनु हरि कृपा मिलहिं नहीं संता' का उल्लेख करते हुए कहा कि जब साक्षात ईश्वर निरंकार की विशेष कृपा होती है, तभी जीवन में सत्संग और संतों-महापुरुषों के दिव्य दर्शन सुलभ होते हैं। उन्होंने इसे परम सौभाग्य का विषय बताते हुए कहा कि आज इस मंच से बच्चों को जो उत्कृष्ट मार्गदर्शन दिया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है; यदि हमारा वर्तमान अच्छा होगा तो भविष्य स्वतः ही उज्जवल हो जाएगा। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि जीवन में सब कुछ बनो वह मुबारक है, परंतु सर्वप्रथम एक अच्छे और सच्चे नागरिक बनो। इसके उपरांत ज्ञान प्रचारक श्रीमती हेमा मुलानी जी ने बहुत ही तार्किक ढंग से समझाया कि जिस प्रकार मकान की नींव मजबूत होने पर ही पूरा मकान मजबूत और सुरक्षित रहता है, ठीक इसी तरह यदि बच्चे बचपन से ही अच्छे संस्कार सीखेंगे तो बड़े होकर वे देश के जिम्मेदार व आदर्श नागरिक बनेंगे। उन्होंने बल देकर कहा कि जीवन जीने की अद्भुत कला केवल सत्संग की शरण में आकर ही प्राप्त होती है। चूंकि बच्चे जो कुछ भी अपने आसपास देखते हैं, वही सीखते हैं, इसलिए हम सभी वयस्कों को हमेशा बच्चों के सामने शिष्ट और अनुकरणीय व्यवहार करना चाहिए।

मीडिया सहायक राजकुमार निरंकारी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस विशाल निरंकारी बाल समागम में कोटा, झालावाड़, बारां, बूंदी, टोंक और सवाई माधोपुर सहित विभिन्न जिलों की अनेकों शाखाओं से आए सैकड़ों प्रतिभावान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने हिंदी, इंग्लिश, सिंधी, पंजाबी और राजस्थानी जैसी विविध भाषाओं में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर पंडाल में उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। समागम की अनूठी शुरुआत बूंदी से आए बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए बेहद भावपूर्ण आध्यात्मिक गीत 'जिंदगी है अमानत' से हुई। इसके पश्चात टोंक से आए बच्चों ने अंग्रेजी भाषा में अपनी अत्यंत प्रभावी प्रस्तुति दी, जबकि हिंडोली से पधारे बच्चों ने जीवन में गुरु की महिमा का बखान करते हुए राजस्थानी भाषा में एक अत्यंत भक्तिमयी लोकगीत गाकर संपूर्ण पंडाल को आत्मविभोर और भावुक कर दिया।

संस्कारों की इसी श्रृंखला में कोटा से आए बच्चों ने एक अत्यंत मार्मिक नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया, जिसके माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी को अपने माता-पिता व बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने तथा उनके द्वारा दी गई अमूल्य शिक्षाओं को जीवन में उतारकर निरंतर आगे बढ़ने की महती प्रेरणा दी। वहीं गंगापुर सिटी से आए नन्हे बच्चों ने साक्षात प्रभु परमात्मा को सदैव अपने अंग-संग (साथ) मानकर प्रतिदिन पूरी निष्ठा से मानवता के कल्याण हेतु कार्य करने का पावन संदेश एक सुंदर हिंदी गीत के माध्यम से प्रसारित किया। निवाई से पधारे बच्चों ने अत्यंत सुंदर एवं सधे हुए शब्दों में सत्संग की असीम महिमा का गुणगान किया, तो लाखेरी से आई नन्हीं बच्ची योगिता ने अंग्रेजी भाषा में समाज के समक्ष अपने अत्यंत प्रखर आध्यात्मिक विचार व्यक्त किए। देवली से आए बच्चों ने अपनी नाट्य प्रस्तुति 'जैसी करनी वैसी भरनी' के माध्यम से समाज को हमेशा अच्छे, सच्चे और निष्कपट कर्म करने की सीख दी। इस भव्य बाल समागम के दौरान एक विशेष 'कवि दरबार' का भी शानदार आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न ब्रांचों से आए बाल कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सुंदर उद्गार व्यक्त किए। समागम के अंतिम चरण में कोटा जोन के जोनल इंचार्ज संत बृजराज सिंह जी यादव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी आगंतुकों, बच्चों और सेवादारों का सहृदय आभार व्यक्त करते हुए उनका हार्दिक अभिनंदन किया, जिसके साथ ही यह ऐतिहासिक बाल समागम मानवता के अमिट संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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