सवाई माधोपुर। न्यायालय ने दो वर्ष पुराने एक लूट और दुष्कर्म प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या दो की अदालत ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी किसी भी नरमी के योग्य नहीं है।

अपर लोक अभियोजक घनश्याम सिंह ने बताया कि पीड़िता ने 5 नवंबर 2022 को बामनवास थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में उल्लेख था कि वह स्कूल से घर लौटने के लिए सड़क किनारे वाहन का इंतजार कर रही थी, तभी मोटरसाइकिल पर आए आरोपी भगवान सहाय ने उसे लालसोट छोड़ने का झांसा देकर अपने साथ बैठा लिया। रास्ते में आरोपी ने अमावरा और भावरा गांवों के बीच सुनसान कच्चे रास्ते पर मोटरसाइकिल रोक ली और बहाने से पीड़िता को जंगल की ओर ले गया। वहां उसने न केवल लूटपाट की बल्कि जबरन दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके पर्स, मोबाइल फोन, सोने की अंगूठी, टॉप्स और चांदी की पायल छीन ली और उसे अधमरी हालत में वहीं छोड़कर फरार हो गया। पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।

मामले की विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद कोर्ट ने आरोपी भगवान सहाय को दोषी ठहराया और उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 50 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड की राशि का एक हिस्सा पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पीड़िता के पुनर्वास में भी योगदान दे सके।

इस फैसले से अदालत ने एक बार फिर यह संदेश

Pratahkal Bureau

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