हिण्डौन सिटी में आरएमपीसीएल का किसान एवं विक्रेता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
कार्यक्रम में संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य और जीरोन उत्पादों की जानकारी दी गई।

हिण्डौन सिटी में आयोजित आरएमपीसीएल के कार्यक्रम में राजस्थान ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष अशोक शर्मा दीप प्रज्वलित कर शुरुआत करते हुए।
मिट्टी की उर्वरता को अक्षुण्ण रखने और कृषि उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से आरएमपीसीएल कमानी के तत्वावधान में हिण्डौन सिटी में एक महत्वपूर्ण किसान एवं विक्रेता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। "स्वस्थ जमीन–स्वस्थ देश" के प्रेरक संदेश पर केंद्रित इस कार्यक्रम में उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन पर गहन विमर्श किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राजस्थान ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष अशोक शर्मा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
आयोजन के दौरान कंपनी के सहायक महाप्रबंधक मदन मुरारी नागर एवं विष्णु वर्मा तथा क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक मोहन श्याम शर्मा ने मानव जीवन एवं फसलों के सर्वांगीण विकास में पोषक तत्वों की महती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतुलित पोषण न केवल बेहतर फसल उत्पादन सुनिश्चित करता है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने में सहायक है। इस अवसर पर कंपनी के उत्पादों, विशेषकर जीरोन (जिंक एवं बोरॉन युक्त एकल सुपर फॉस्फेट) और जीरोन पावर प्लस (जिंक, बोरॉन एवं मैग्नीशियम युक्त एकल सुपर फॉस्फेट) की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि इन उत्पादों के प्रयोग से भूमि की गुणवत्ता, उर्वरता और फसल उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने "स्वस्थ जमीन – स्वस्थ फसल – स्वस्थ मानव – स्वस्थ देश" की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए किसानों से असंतुलित उर्वरकों के बजाय संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने इन उत्पादों को मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और फसलों की गुणवत्ता में सुधार लाने वाला एक प्रभावी समाधान बताया। बैठक में सम्मिलित कृषि उर्वरक विक्रेताओं ने भी अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए पुष्टि की कि जीरोन एवं जीरोन पावर प्लस फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। यह कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास रहा।

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